KNEWS DESK- ग्रेटर नोएडा और जेवर क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहे एयरपोर्ट के साथ अब कृषि उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ावा देने की तैयारी है. यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में करीब पांच एकड़ जमीन पर प्रदेश का पहला इंटीग्रेटेड टेस्टिंग एंड ट्रीटमेंट पार्क बनाया जाएगा. इसके साथ आधुनिक मंडी विकसित करने की भी योजना है.
इस परियोजना से किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है. फिलहाल उत्तर प्रदेश में इस तरह की एकीकृत सुविधा उपलब्ध नहीं है. परियोजना के जरिए कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए तैयार करने से लेकर निर्यात तक की कई प्रक्रियाएं एक ही परिसर में पूरी की जा सकेंगी.
यमुना अथॉरिटी देगी पांच एकड़ जमीन
उत्तर प्रदेश के कृषि विपणन और कृषि विदेश व्यापार मंत्री दिनेश सिंह के मुताबिक, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नजदीक यह केंद्र विकसित किया जाएगा. इसके लिए यमुना अथॉरिटी की ओर से पांच एकड़ जमीन उपलब्ध कराई जाएगी.
यीडा के सीईओ आरके सिंह के अनुसार, बोर्ड की ओर से परियोजना को सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है. इस केंद्र का उद्देश्य कृषि और खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता जांच, उपचार, प्रसंस्करण और निर्यात संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाना है.
एक ही जगह मिलेगी कई सुविधाएं
इंटीग्रेटेड पार्क में आधुनिक टेस्टिंग लैब स्थापित की जाएगी. यहां फल, सब्जियां, दालें, अनाज, मसाले, डेयरी और प्रोसेस्ड फूड की गुणवत्ता एवं सुरक्षा की जांच अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप की जा सकेगी.
इसके अलावा उत्पादों की सॉर्टिंग, ग्रेडिंग, वॉशिंग, ड्राइंग, प्री-कूलिंग और नियंत्रित तापमान वाले कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की योजना है.
निर्यातकों को सर्टिफिकेशन और जरूरी दस्तावेजों के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. क्वारंटाइन, गुणवत्ता और ऑर्गेनिक प्रमाणन से जुड़ी सुविधाएं भी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की योजना है.
किसानों का समय और लागत दोनों बचेंगे
फिलहाल किसानों और निर्यातकों को कृषि उत्पादों की जांच, पैकेजिंग, उपचार और प्रमाणन के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ता है. इससे समय और लॉजिस्टिक्स लागत दोनों बढ़ती हैं.
एयरपोर्ट के पास पार्क बनने से उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए जल्दी तैयार किया जा सकेगा. खासकर ताजे फल और सब्जियों को कम समय में कार्गो के जरिए विदेश भेजने में मदद मिलेगी.
इससे किसानों को बड़े बाजार तक पहुंच मिलने के साथ उनके उत्पादों की गुणवत्ता और निर्यात क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है. वहीं FPO और फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के लिए भी यह केंद्र निर्यात कारोबार को आसान बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है.