प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भारत के घरेलू मामलों में कथित विदेशी हस्तक्षेप और संदिग्ध फंडिंग को लेकर दो विदेशी संस्थाओं के खिलाफ जांच शुरू की है। जांच में करीब 15 लाख अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 13.5 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन सामने आए हैं। ED को शक है कि यह रकम कई देशों के रास्ते घुमाकर भारत में मौजूद कुछ संस्थाओं और व्यक्तियों तक पहुंचाई गई।
Knews Desk – शुरुआती जांच के अनुसार, रकम जर्मनी के डॉ. मैथियास कार्ल वोग्ट ट्रस्ट से शुरू हुई थी। जर्मन नियमों से बचने के लिए इसे पहले लिथुआनिया की कंपनी एक्स-बेस डिजिटल यूएबी (XBase Digital UAB) को भेजा गया। जांच में सेंट किट्स एंड नेविस में रजिस्टर्ड कंपनी TCC Digital Markets Ltd को 10 लाख डॉलर के फंड का सोर्स पाया गया है।
जांच के मुताबिक, इन डिजिटल संपत्तियों को हवाला के जरिए दुबई और लिथुआनिया होते हुए ब्रिटेन की एक कंपनी के Airwallex (UK) Ltd खाते में फरवरी से मार्च 2026 के बीच पहुंचाया गया। सामने आया है कि सेंट किट्स एंड नेविस की कंपनी ने इस रकम को ग्रांट के तौर पर दो किस्तों में ब्रिटिश कंपनी को ट्रांसफर किया।
भारत में व्यक्तियों और संस्थाओं तक पहुंची राशि
यह राशि सेंट किट्स एंड नेविस में रजिस्टर्ड TCC Digital Markets Ltd के जरिए अनुदान के रूप में दो किश्तों में ब्रिटेन की कंपनी को मिली। ये किश्तें GB 67,006 और GB 71,746 बताई गई हैं। इसके बाद यह रकम भारत में कुछ व्यक्तियों और संस्थाओं तक पहुंचाई गई।
ED को कनाडा में रजिस्टर्ड एक अन्य कंपनी ZBase Digital Inc के जरिए भी 5 लाख डॉलर ट्रांसफर किए जाने का पता चला है। यह रकम फरवरी 2026 में उसी ब्रिटिश कंपनी के खाते में भेजी गई। इस तरह कुल 1.5 मिलियन डॉलर के संदिग्ध फंड ट्रेल की जांच की जा रही है।
ED इस पूरे फंड ट्रेल को लेकर Airwallex और संबंधित देशों की एजेंसियों के साथ मिलकर सत्यापन कर रही है। जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि विदेशी संस्थाओं से आई यह रकम किन माध्यमों से भारत पहुंची और इससे जुड़े व्यक्ति व संस्थाएं कौन हैं।