KNEWS DESK- पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अपीलीय ट्रिब्यूनल के कामकाज और वहां लंबित मामलों का विवरण मांगा है। अदालत ने खास तौर पर यह जानकारी मांगी कि अब तक कितनी अपीलों पर फैसला हो चुका है और कितने मामले अभी लंबित हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। चौधरी ने SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों से जुड़ी अपीलों के जल्द निपटारे की मांग की है।
‘सिर्फ अपील दायर होना काफी नहीं’
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल अपीलें दायर होना पर्याप्त नहीं है। अदालत यह जानना चाहती है कि इन मामलों में अब तक क्या परिणाम सामने आए हैं और कितनी शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है।
अदालत ने चुनाव आयोग से अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने लंबित और निपटाए गए मामलों का पूरा आंकड़ा उपलब्ध कराने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जरूरी सुधारों पर विचार किया जा सकता है।
PDS का मुद्दा अलग मामला
सुनवाई के दौरान अधीर रंजन चौधरी की ओर से पेश वकील ने उन लोगों का मुद्दा भी उठाया, जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। दावा किया गया कि ऐसे लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS से मिलने वाले लाभों में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि PDS से जुड़े लाभों का मामला उठाना है तो उसके लिए कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि मौजूदा याचिका का मुख्य विषय SIR से संबंधित अपीलीय ट्रिब्यूनल की निगरानी और मामलों के निपटारे से जुड़ा है।
ट्रिब्यूनल के ढांचे में सुधार पर जोर
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सुनवाई के दौरान अपीलीय ट्रिब्यूनल के पूरे ढांचे पर पुनर्विचार की जरूरत बताई। उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से जजों तक पहुंच और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल जैसे उपायों का सुझाव दिया।
अदालत ने साफ किया कि फिलहाल उसका मुख्य फोकस इस बात पर है कि ट्रिब्यूनल कितने मामलों का निपटारा कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर वह मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम हटाने या बनाए रखने के मूल विवाद में नहीं जा रहा, बल्कि मामलों के प्रभावी निपटारे की निगरानी कर रहा है।
25 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने मामले को 25 अगस्त को इसी तरह के अन्य लंबित मामलों के साथ सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले को 25 अगस्त के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
अदालत के इस कदम से अब चुनाव आयोग को SIR से जुड़े अपीलीय मामलों की स्थिति और उनके निपटारे से संबंधित आंकड़े अदालत के सामने रखने होंगे।
पहले भी ट्रिब्यूनल गठित करने का आदेश
पश्चिम बंगाल SIR से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट पहले भी अपीलीय व्यवस्था को लेकर निर्देश दे चुका है। अदालत ने ऐसे लोगों की शिकायतों और अपीलों की सुनवाई के लिए स्वतंत्र अपीलीय ट्रिब्यूनल की व्यवस्था की है, जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
अब अदालत का ताजा रुख इन ट्रिब्यूनल के कामकाज और मामलों के निपटारे की गति पर केंद्रित है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा आंकड़े मांगे जाने के बाद चुनाव आयोग को यह बताना होगा कि अब तक कितने मामलों का फैसला हो चुका है और कितने मामले अभी विचाराधीन हैं।