वकीलों की हिरासत और इंटरनेट बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल, CJI सूर्यकांत बोले- कामकाज में बाधा बर्दाश्त नहीं

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच वकीलों की हिरासत, सुप्रीम कोर्ट के कामकाज में रुकावट और इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने से जुड़े मामलों पर शीर्ष अदालत मंगलवार, 13 अक्टूबर को सुनवाई करेगी।

Knews Desk– सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान वकीलों को हिरासत में लिए जाने, अदालत के कामकाज में बाधा और इंटरनेट सेवाएं बंद करने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। ये याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर की गई हैं।

सोमवार को SCBA के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील प्रदीप राय ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ के सामने इस मामले का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शनों के कारण वकीलों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और इस दौरान इंटरनेट सेवाएं भी बंद की जा रही हैं। वरिष्ठ वकील नाडकर्णी ने भी एक अन्य वकील की ओर से याचिका दायर किए जाने की जानकारी दी।

‘अदालत के कामकाज में नहीं आनी चाहिए बाधा’

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण गतिविधियां सुचारू रूप से चलनी चाहिए, लेकिन इसकी वजह से सुप्रीम कोर्ट के कामकाज पर असर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वकीलों, अदालत के कर्मचारियों और मुकदमों से जुड़े लोगों की आवाजाही में किसी तरह की रुकावट नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई करने की बात कही।

SCBA अध्यक्ष प्रदीप राय ने भी कहा कि राजनीतिक दलों को अदालत के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। इस पर CJI सूर्यकांत ने बताया कि वह प्रदर्शनकारियों से भी अपील कर चुके हैं कि सुप्रीम कोर्ट को इन विरोध-प्रदर्शनों में नहीं घसीटा जाना चाहिए।

वकीलों को प्रदर्शन में शामिल होने का अधिकार

दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी एक अन्य याचिका का उल्लेख वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने किया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वकीलों को विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने का अधिकार है। हालांकि, इस अधिकार के साथ अदालत के कामकाज और लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

गोपाल शंकरनारायणन ने दावा किया कि सार्वजनिक रूप से धारा 163 से संबंधित कोई आदेश उपलब्ध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि वरिष्ठ वकीलों को सड़कों पर घसीटा जा रहा है और पुलिस की मौजूदगी में बच्चों पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए थीं।

‘बच्चों के सिर पर मारा गया, फिर गर्व से बताया’

वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने बच्चों के सिर पर हमला किया और बाद में गर्व से ऐसा करने की बात कही। उन्होंने कहा कि एक ओर वकीलों से संयम बरतने को कहा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर दो अन्य वकीलों को बसों में हिरासत में लिया गया। उन्होंने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि वह फिलहाल इस मामले में कुछ नहीं कहना चाहते, लेकिन सुप्रीम कोर्ट को ऐसी स्थिति नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि प्रत्येक वकील को विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने का अधिकार है। अदालत इन मामलों पर मंगलवार, 13 अक्टूबर को सुनवाई करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *