सुप्रीम कोर्ट में गूंजेगा राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस, कल विशेष सुनवाई के लिए लिस्टेड

डिजिटल डेस्क- अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गया है। इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसे सोमवार को मेंशनिंग (विशेष उल्लेख) के लिए लिस्टेड किया गया है। दूसरी ओर, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई बेहद तेज कर दी है। इस हाई-प्रोफाइल चोरी कांड में शामिल सभी चारों अभियुक्तों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, और अब उनके ठिकानों से पुख्ता सबूत जुटाए जा रहे हैं।

आरोपियों के घरों पर पुलिस की रेड, बैंक कर्मियों की मिलीभगत के संकेत

चढ़ावा चोरी के मामले में पुलिस की कई टीमों ने आरोपियों के घरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। पुलिस ने मुख्य आरोपी टिन्नू यादव के घर समेत उसके भतीजे के आवास पर रेड डाली। इसके साथ ही मामले के अन्य सह-आरोपियों, अनुकल्प और लवकुश मिश्रा के घरों पर भी पुलिस ने सघन तलाशी अभियान चलाया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह बात भी सामने आ रही है कि इस पूरे खेल में कुछ बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भी मिलीभगत हो सकती है, जिसके संकेत मिलने के बाद अब बैंक खातों और ट्रांजैक्शन की भी गहनता से जांच की जा रही है।

विवादों के बीच महासचिव चंपत राय का इस्तीफा

राम मंदिर के उद्घाटन को अभी मुश्किल से ढाई साल ही बीते थे कि मंदिर ट्रस्ट को मिले दान में भ्रष्टाचार और चोरी के इन आरोपों ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस बड़े विवाद के केंद्र में आने के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद पर रहे चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस जांच ने राम मंदिर प्रोजेक्ट की अब तक की सबसे बड़ी छानबीन का रूप ले लिया है, जिसने ट्रस्ट के प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कौन हैं चंपत राय?

79 वर्षीय चंपत राय का नाम राम जन्मभूमि आंदोलन के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने दशकों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक और विश्व हिंदू परिषद के सीनियर पदाधिकारी के रूप में मुख्य रूप से पर्दे के पीछे रहकर काम किया। कानूनी, संगठन और प्रशासनिक चुनौतियों के बीच आंदोलन को आगे बढ़ाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने के बाद उन्हें भव्य मंदिर के निर्माण और प्रबंधन की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस विवाद से पहले तक वे कम चर्चा में रहने वाले एक कुशल संगठक माने जाते थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *