Knews Desk-पंजाब के मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने के मुख्यमंत्री भगवंत मान के फैसले पर सियासत तेज हो गई है। झोटा के परिवार की मांग स्वीकार करते हुए राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंपने का ऐलान किया। वहीं, पंजाब बीजेपी के महासचिव परमिंदर सिंह बराड़ ने इसे जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 20 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि परिवार की मांग को स्वीकार करते हुए झोटा हत्याकांड की जांच CBI को सौंपी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार नशा तस्करों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी और पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए जरूरी कदम उठाएगी। आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने भी इस फैसले की सराहना की।
हालांकि, पंजाब बीजेपी के महासचिव परमिंदर सिंह बराड़ ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एयरपोर्ट पहुंचने से पहले ही मुख्यमंत्री ने आनन-फानन में जांच CBI को सौंपने का फैसला कर लिया। बराड़ के मुताबिक, पीड़ित परिवार और इंसाफ मोर्चा लंबे समय से CBI जांच की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने पहले उनकी मांग स्वीकार नहीं की।
परविंदर सिंह झोटा का परिवार लगातार मामले की CBI जांच की मांग कर रहा था। उनकी हत्या के बाद से यह मामला पंजाब की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है और विपक्षी दल आम आदमी पार्टी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।
गौरतलब है कि 13 अक्टूबर 2026 को मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह नशा तस्करी और नशीले पदार्थों की बिक्री के खिलाफ अभियान चला रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, मानसा के एक बाजार में मेडिकल स्टोर के अंदर हुई इस घटना में स्टोर मालिक अश्वनी कुमार का नाम सामने आया। बताया गया कि झोटा ने एक बुजुर्ग को नशीले पदार्थ बेचने के संबंध में सवाल किया था। मामले में आरोपी को राजस्थान के सालासर से हिरासत में लिया गया है।