डिजिटल डेस्क- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने वैश्विक संकट के बीच देशवासियों से की गई अपनी विशेष अपीलों के जमीनी असर पर खुलकर चर्चा की। पीएम मोदी ने कहा, “मैं देश के हर नागरिक का आभारी हूं कि मेरी अपील का उन्होंने न सिर्फ समर्थन किया बल्कि उसमें सहयोग भी कर रहे हैं।” उन्होंने बताया कि देश के कई परिवारों ने अपने अनोखे और सकारात्मक अनुभव उनके साथ साझा किए हैं, जिससे यह साफ है कि देश संकट के इस दौर में एकजुटता के साथ आगे बढ़ रहा है।
‘शादियों में पुराना सोना ही करेंगे रिसाइकल’, लोगों ने बदले फैसले
पीएम मोदी ने बताया कि ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण उपजे वैश्विक संकट के बीच उन्होंने पिछले दिनों जनता से कुछ समय के लिए पेट्रोल-डीजल बचाने, कार पूलिंग करने और एक साल तक नया सोना न खरीदने की अपील की थी। इस अपील के असर का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, “कितने ही परिवारों ने संदेश भेजकर बताया है कि उन्होंने तय किया है कि घर के विवाह में इस बार नया सोना नहीं खरीदेंगे। अगर जरूरत पड़ी, तो वे पुराने सोने को ही रिसाइकल कर नए गहने बना लेंगे।”
कार पूलिंग और प्राकृतिक खेती को लेकर भी दिखा उत्साह
सोने के अलावा, ईंधन बचाने की मुहिम पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कई लोगों ने उनके साथ कार पूलिंग के बेहतरीन अनुभव साझा किए हैं। एक ही दिशा में अलग-अलग गाड़ियों से जाने वाले लोग अब संसाधन और ईंधन बचाने के लिए एक साथ सफर कर रहे हैं। इसके साथ ही, पीएम ने किसानों का भी आभार जताया जिन्होंने खेत बचाने के लिए रसायन मुक्त (केमिकल फ्री) खेती और प्राकृतिक खाद का ज्यादा-से-ज्यादा इस्तेमाल करने के उनके आग्रह को स्वीकार किया है। उन्होंने यह भी दोहराया कि लोग इस दौर में विदेशों में छुट्टियां मनाने से भी परहेज कर रहे हैं।
नौसेना के बेड़े में शामिल हुए 3 नए युद्धपोत, आत्मनिर्भरता पर जताया गर्व
‘मन की बात’ में देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने जून महीने में मिली बड़ी रक्षा उपलब्धियों पर गर्व जताया। उन्होंने कहा, “हाल ही में मुझे कोलकाता में नौसेना के एक कार्यक्रम में शामिल होने का मौका मिला, जहां INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। ये उपलब्धियां देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के साथ-साथ हमारी आत्मनिर्भरता की कहानी बयां करती हैं।”