Knews Desk– महाराष्ट्र में भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर चल रहा MPSC अभ्यर्थियों का आंदोलन रविवार देर रात समाप्त हो गया। राज्य सरकार ने जांच समिति गठित करने और आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने के फैसले के बाद अभ्यर्थियों की मांगों पर सहमति जताई है।
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों को लेकर अभ्यर्थी पिछले 10 दिनों से पुणे में प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी प्रमुख मांगों में निष्पक्ष जांच, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाना शामिल था। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले की अध्यक्षता में समिति गठित की है। इसमें वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे को सचिव बनाया गया है। समिति में IPS अधिकारी लक्ष्मी गौतम, पूर्व IAS अधिकारी गणेश पाटिल और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पीडी नाइक भी शामिल हैं।
रविवार को मंत्री शिवेंद्र राजे भोसले के नेतृत्व में सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों से मुलाकात की। इसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बातचीत कर उनकी मांगों पर सहमति की जानकारी दी गई। इसके बाद अभ्यर्थियों के प्रतिनिधि विवेकानंद पाटिल ने आंदोलन फिलहाल समाप्त करने की घोषणा की। अभ्यर्थियों ने अगले तीन वर्षों में 70 हजार पदों पर भर्ती, जनवरी में होने वाली ग्रुप-सी परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने और आंदोलन से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की भी मांग की है।
MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि सरकार ने प्रश्नपत्र लीक मामले में न्यायिक जांच की घोषणा की है। उन्होंने नैतिकता को प्राथमिकता देते हुए जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने का फैसला किया है।
वहीं, आंदोलन के दौरान पुणे पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन, यातायात बाधित करने और निषेधाज्ञा के उल्लंघन के आरोप में 15 प्रतिनिधियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। प्रदर्शन स्थल पर कथित तौर पर ड्रोन उड़ाने के मामले में भी पांच लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई।