भारत में ‘रिजीम चेंज’ की कोशिशों पर मोहन भागवत का बयान, वैश्विक ताकतों पर लगाए आरोप

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में विजयादशमी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि केवल सत्ता परिवर्तन से किसी देश की समस्याएं हल नहीं होतीं। उन्होंने नेपाल, बांग्लादेश, फ्रांस और अल्बानिया के घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कुछ वैश्विक शक्तियों पर समाजों में अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों का उद्देश्य समस्याओं का समाधान होना चाहिए, न कि समाज में विभाजन बढ़ाना।

Knews Desk- RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं और कुछ तत्व निजी महत्वाकांक्षाओं के कारण इन प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने अनुशासित तरीके से प्रगति की है, लेकिन कुछ ताकतें इस विकास में बाधा डालना चाहती हैं।

भागवत ने फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल के घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि बाहरी प्रभाव अस्थिरता को बढ़ावा दे सकते हैं। उनके मुताबिक, सत्ता परिवर्तन की मांग से अपने आप समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता। उन्होंने आगाह किया कि ऐसे आंदोलन राजनीतिक हितों का साधन बन सकते हैं और समाज में विभाजन बढ़ा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन उनका उद्देश्य जनहित में समाधान खोजना होना चाहिए। राजनीतिक नेताओं, प्रदर्शनकारियों और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके कदमों से समाज में कड़वाहट और दुश्मनी न बढ़े। उन्होंने संविधान, सभ्य सार्वजनिक संवाद और मर्यादित आचरण का सम्मान करने की अपील भी की।

भागवत ने आरोप लगाया कि भारत और संघ को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ वैश्विक शक्तियां भारत का विकास तो चाहती हैं, लेकिन उसे इतना शक्तिशाली होते नहीं देखना चाहतीं कि उनके वर्चस्व को चुनौती मिले। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध को किसी व्यक्ति, समूह या विचारधारा के खिलाफ नफरत फैलाने का माध्यम नहीं बनना चाहिए।

अपने संबोधन में भागवत ने संघ की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ पूरे विश्व को अपना परिवार मानता है और अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए काम करता रहेगा। उन्होंने भारत, हिंदू समाज और संघ को कमजोर करने की कोशिशों का भी जिक्र किया।

नेपाल में हुई त्रासदी का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में एकतरफा विकास ऐसी घटनाओं का एक संभावित कारण हो सकता है। उन्होंने प्रभावित लोगों के प्रति दुख जताते हुए विकास के लिए समग्र और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञान और तकनीक के साथ उनके सही इस्तेमाल की समझ, नैतिकता और अनुशासन भी जरूरी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *