KNews Desk: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमाता नजर आ रहा है. आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने शनिवार को सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर 12 सितंबर तक मराठा समाज की मांगों पर फैसला नहीं हुआ तो मुंबई में बड़ा आंदोलन किया जाएगा.
जरांगे ने कहा कि सरकार आंदोलन के दायरे को सीमित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन मराठा समाज की आवाज को दबाया नहीं जा सकता.
12 सितंबर तक सरकार को दिया समय
मनोज जरांगे ने कहा कि सरकार को अब 15 दिनों का समय दिया जा रहा है. 29 अगस्त से 12 सितंबर तक आंदोलन स्थल पर रोज सुबह और शाम पहुंचकर सरकार से मांगों के समाधान की कोशिश करने की बात कही गई है.
उन्होंने कहा कि अगर 12 सितंबर तक मांगें पूरी नहीं हुईं तो मुंबई जाना तय है. जरांगे ने यह भी चेतावनी दी कि इसके बाद आंदोलनकारियों को मुंबई से वापस लाना उनके लिए संभव नहीं होगा.
मुंबई में बड़े आंदोलन की तैयारी
जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से मराठा समाज के लोगों से मुंबई पहुंचने की अपील की है. उन्होंने जरूरत पड़ने पर मुंबई को चारों तरफ से घेरने की रणनीति अपनाने की बात कही.
उन्होंने बड़ी संख्या में मोटरसाइकिलों के साथ मुंबई पहुंचने का भी आह्वान किया. साथ ही मुंबई के मराठा समाज से आंदोलनकारियों के लिए भोजन और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं करने की अपील की.
गणेशोत्सव के बीच बढ़ सकती है चुनौती
जरांगे की यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब 14 सितंबर से महाराष्ट्र में गणेशोत्सव शुरू होने वाला है. गणेशोत्सव करीब 11 दिनों तक चलने वाला है और मुंबई में इस दौरान बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उत्सव मनाते हैं.
ऐसे में अगर मराठा समाज का बड़ा आंदोलन मुंबई पहुंचता है, तो प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती हो सकती है.
‘आरक्षण सिर्फ कुणबी के जरिए मिलेगा’
मराठा आरक्षण को लेकर जरांगे ने कहा कि टिकाऊ और पक्का आरक्षण कुणबी के जरिए ही संभव है. उन्होंने SEBC, EWS, सारथी और कुणबी GR से जुड़े मुद्दों को भी आगे बढ़ाने की बात कही.
उन्होंने सरकार से इन मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की.
हिंसा से दूर रहने की अपील
जरांगे ने समर्थकों से आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने की अपील भी की. उन्होंने साफ कहा कि उनके रहते आगजनी और पत्थरबाजी नहीं होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि वह हिंसा नहीं चाहते और आंदोलन के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी से समाज का नुकसान नहीं होना चाहिए. साथ ही उन्होंने किसानों, धनगर, दलित, मुस्लिम, OBC, लमानी और कैकाड़ी समाज से जुड़े मुद्दों को भी उठाया.
अब सबकी नजर 12 सितंबर पर है. अगर तब तक सरकार और मराठा आंदोलन के बीच कोई समाधान नहीं निकलता, तो मुंबई में बड़े आंदोलन की स्थिति बन सकती है.