Knews Desk – दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद प्रशासन और नगर निगम ने आसपास की इमारतों की सुरक्षा जांच तेज कर दी है। हादसे वाली इमारत से सटी एक चार मंजिला इमारत को भी बेहद असुरक्षित पाया गया है। इसके बाद अब इसे नियंत्रित तरीके से गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
बताया जा रहा है कि चार मंजिला इमारत में एक भी पिलर नहीं है। हादसे के बाद इसकी संरचना कमजोर हो गई और इमारत एक तरफ झुक गई। इसके चलते इसके कभी भी गिरने का खतरा बना हुआ था। सुरक्षा को देखते हुए इमारत को खाली करा दिया गया है और चरणबद्ध तरीके से इसे ध्वस्त किया जा रहा है। इमारत को गिराने से पहले निचले हिस्से में लोहे के जैक और अतिरिक्त सपोर्ट लगाए गए हैं। मौके पर मौजूद टीम पहले लोहे के बीम और सपोर्ट की मदद से संरचना को संभाल रही है। इसके बाद छोटी हाइड्रोलिक कटर मशीनों से निर्माण सामग्री हटाई जा रही है। कुछ हिस्सों में दीवारों को हथौड़े से तोड़कर वहां आयरन बीम लगाए जा रहे हैं, ताकि कार्रवाई के दौरान इमारत अचानक न गिरे।
असुरक्षित इमारत को एक साथ गिराने के बजाय ऊपर से नीचे की तरफ चरणबद्ध तरीके से तोड़ा जाएगा। पहले ऊपरी मंजिलों को हटाया जाएगा और इसके बाद धीरे-धीरे नीचे के फ्लोर को ध्वस्त किया जाएगा। इस दौरान आसपास की इमारतों और लोगों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। सत्य निकेतन हादसे के बाद आसपास की अन्य इमारतों की भी जांच की जा रही है। कुछ भवनों में अतिरिक्त सपोर्ट के लिए लोहे के जैक लगाए गए हैं। हादसे वाली इमारत के पास मौजूद एक केमिस्ट की दुकान के आसपास भी लोहे के पिलर लगाकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है।
वहीं, हादसे के बाद करीब 27 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था। बचाव दल ने मलबे से कुल 12 लोगों को बाहर निकाला, जिनमें सात लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच घायलों का इलाज जारी है। इस घटना ने राजधानी में जर्जर और असुरक्षित इमारतों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में पुलिस ने PG मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया है। हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, जबकि महेश को दो दिन की पुलिस कस्टडी मिली है। पुलिस के मुताबिक, बिजली कनेक्शन हरिराम के नाम और संपत्ति उर्मिला के नाम थी, जबकि PG का संचालन महेश करता था। पुलिस अब PG ऑपरेटरों और लेबर कॉन्ट्रैक्टर की भी तलाश कर रही है।
हादसे के बाद MCD ने सभी जोन के कार्यकारी अभियंताओं को अपने क्षेत्रों की इमारतों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को 10 सितंबर तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी है। इस जानकारी को दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल होने वाले हलफनामे में भी शामिल किया जाएगा।