संयुक्त राष्ट्र में भारत ने शांति अभियानों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जिन देशों के सैनिक इन मिशनों में जमीन पर तैनात होते हैं, उन्हें मिशन के जनादेश तैयार करने और फैसले लेने की प्रक्रिया में उचित भागीदारी मिलनी चाहिए। भारत ने कहा कि जमीनी स्तर की चुनौतियों को समझने वाले सैनिक योगदानकर्ता देशों की राय को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
Knews Desk- संयुक्त राष्ट्र में भारत की ओर से कर्नल तरुणेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि शांति अभियान तभी प्रभावी हो सकते हैं, जब उनके पीछे ठोस राजनीतिक प्रक्रिया हो। उन्होंने जोर दिया कि सैनिक भेजने वाले देशों से पर्याप्त सलाह किए बिना किसी मिशन का जनादेश तय करना उचित नहीं है।
भारत अब तक संयुक्त राष्ट्र के 50 से अधिक शांति अभियानों में 3 लाख से ज्यादा सैनिकों को तैनात कर चुका है। इस दौरान भारत के 184 जवानों ने ब्लू हेलमेट के तहत विश्व शांति के लिए अपनी जान गंवाई है। भारत ने शांति सैनिकों पर होने वाले हमलों को लेकर भी चिंता जताई। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों पर हमले करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए और ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
भारत ने शांति अभियानों में उन्नत तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों को तेजी से शामिल करने की भी अपील की। भारत के अनुसार इससे अभियानों की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, हालात की बेहतर निगरानी हो सकेगी और कठिन क्षेत्रों में लॉजिस्टिक चुनौतियां कम करने में मदद मिलेगी।