JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला हाईकोर्ट ने किया निरस्त, करीब 2300 अभ्यर्थियों की नौकरी बरकरार

KNEWS DESK– झारखंड की चर्चित JSSC-CGL परीक्षा और नियुक्तियों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार के उस फैसले को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत JSSC-CGL परीक्षा और इसके जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने का निर्णय लिया गया था। इस फैसले से परीक्षा में सफल होकर सरकारी विभागों में नौकरी कर रहे करीब 2300 चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि कथित अनियमितताओं के आधार पर सभी चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां एक साथ रद्द नहीं की जा सकतीं। इसके बजाय सेग्रीगेशन यानी अलग-अलग छंटनी की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जांच के दौरान गलत तरीके से नौकरी हासिल करने वाले अभ्यर्थियों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। वहीं, जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति सही पाई जाएगी, उनकी नौकरी बरकरार रहेगी।

दरअसल, JSSC-CGL परीक्षा विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्तियों के लिए परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा के बाद दो हजार से अधिक अभ्यर्थियों का चयन हुआ और उन्हें अलग-अलग विभागों में नियुक्तियां दी गईं। हालांकि, परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद विवाद खड़ा हो गया।

राज्य सरकार ने CID जांच में सामने आए तथ्यों और अभ्यर्थियों के आंदोलन का हवाला देते हुए 18 अगस्त 2026 को JSSC-CGL समेत कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया था। इसके खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि कुछ अभ्यर्थियों की कथित गड़बड़ी के आधार पर पूरी परीक्षा और सभी नियुक्तियां रद्द करना उचित नहीं है। वहीं, सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित होने का हवाला देते हुए अपना फैसला सही बताया था।

अदालत ने 8 अक्टूबर को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। 6 नवंबर को फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों को राहत दी और संदिग्ध अभ्यर्थियों की पहचान कर अलग-अलग कार्रवाई का रास्ता तय किया।

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