KNEWS DESK- जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के बाद देश की राजनीति में Gen Z युवाओं की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। युवाओं की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए राजनीतिक दल अब उन्हें अपने साथ जोड़ने की रणनीति बनाने लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर राहुल गांधी तक कई बड़े नेता युवाओं से सीधा संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
छात्र आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से जुड़ने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर छात्रों को संबोधित करते हुए एक वीडियो साझा किया, जिसे काफी बड़ी संख्या में लोगों ने देखा। इसके बाद प्रधानमंत्री ने युवाओं के साथ संवाद बढ़ाने के लिए कई अन्य वीडियो भी पोस्ट किए। उन्होंने अपने मंत्रियों और पार्टी नेताओं को भी युवाओं तक पहुंच बनाने पर जोर देने को कहा।
पीएम मोदी ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि देश के युवाओं के लिए सबसे पहले राष्ट्र होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपने अनुभव और यात्राओं को सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करने की अपील की। उनका कहना था कि युवाओं की भागीदारी देश की एकता और विकास में अहम भूमिका निभा सकती है।
बीजेपी ने शुरू किया युवा संवाद अभियान
प्रधानमंत्री की पहल के बाद भारतीय जनता पार्टी ने भी युवाओं से संपर्क बढ़ाने के लिए कार्यक्रम शुरू किए हैं। दिल्ली बीजेपी की ओर से “युवा संवाद (Gen-Z with Modi)” कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र शामिल हुए।
कार्यक्रम में छात्रों ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर अपनी राय रखी। कुछ युवाओं ने कहा कि आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसका उद्देश्य सकारात्मक और समाज को जोड़ने वाला होना चाहिए। वहीं कुछ प्रतिभागियों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ ऐसे नारे लगाए गए जो सामाजिक सद्भाव के खिलाफ थे।
चुनावों में Gen Z की बढ़ती अहमियत
युवाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी का असर चुनावी राजनीति में भी दिखाई दे रहा है। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में भी Gen Z मतदाताओं को लेकर राजनीतिक दल सक्रिय नजर आ रहे हैं।
जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने छात्रों के आंदोलन और उन पर हुई कार्रवाई को मुद्दा बनाते हुए कहा कि इसका प्रभाव कई राज्यों में देखने को मिलेगा। उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में युवाओं को प्रमुखता दी है और युवाओं के मुद्दों को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाया है।
वहीं बीजेपी ने भी युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश शुरू कर दी है। बीजेपी नेताओं ने युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए और उनके साथ बातचीत के जरिए जुड़ने का प्रयास किया।
विपक्ष भी युवाओं के मुद्दों पर सक्रिय
कांग्रेस समेत विपक्षी दल भी युवाओं के मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्र आंदोलन के दौरान युवाओं के समर्थन में बयान दिए और प्रदर्शन में घायल छात्रों से मुलाकात की।
राहुल गांधी ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान जरूरी है और प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। कांग्रेस लगातार पेपर लीक और युवाओं से जुड़े रोजगार के मुद्दों को उठाती रही है।
चुनाव लड़ने की उम्र 21 साल करने की मांग
Gen Z की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र घटाने की मांग भी तेज हो गई है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मांग की है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की उम्र 25 साल से घटाकर 21 साल की जाए। उन्होंने तर्क दिया कि जब 21 साल की उम्र में युवा प्रशासनिक सेवाओं में अधिकारी बनने के योग्य हो सकते हैं, तो उन्हें चुनाव लड़ने का अवसर भी मिलना चाहिए। तेलंगाना सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर केंद्र से संविधान संशोधन की मांग करने की तैयारी में है।
Gen Z अब केवल सोशल मीडिया तक सीमित युवा वर्ग नहीं रह गया है, बल्कि वह राजनीतिक फैसलों और चुनावी रणनीतियों को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण समूह बनता जा रहा है। आने वाले समय में राजनीतिक दलों के लिए युवाओं की आवाज, उनकी समस्याएं और उनकी अपेक्षाएं अहम चुनावी मुद्दे बन सकती हैं।