KNEWS DESK- उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में अभियुक्तों को बड़ा झटका लगा है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मामले में दोषी ठहराए गए पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट में लगातार दो दिनों तक मामले की सुनवाई हुई, जिसके बाद आरोपियों को राहत नहीं मिली।
जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यालय की ओर से सरकार का पक्ष सामने रखा गया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से मजबूत कानूनी पैरवी की गई, जिसके चलते आरोपियों को जमानत नहीं मिल सकी। सरकार ने दोहराया कि अंकिता को न्याय दिलाना और दोषियों को कानून के तहत सख्त सजा दिलाना उसकी प्राथमिकता रही है।
सरकार ने गिनाए अब तक के कदम
मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, अंकिता भंडारी की हत्या का मामला सामने आने के बाद आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया था। निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया। इसके अलावा आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई शुरू की गई। जांच के दौरान करीब 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट तैयार की गई, जिसमें महत्वपूर्ण साक्ष्यों के साथ करीब 100 गवाहों के बयान शामिल किए गए। सरकार का कहना है कि अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में लगातार मजबूत तरीके से अपना पक्ष रखा, जिसके चलते आरोपियों को जमानत नहीं मिल सकी।
दोषियों को हो चुकी है उम्रकैद
सरकार ने कहा कि मामले की जांच और मजबूत अभियोजन के बाद आरोपियों को अदालत से उम्रकैद की सजा मिली। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, सरकार ने शुरुआत से ही यह स्पष्ट कर दिया था कि आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के सामने जवाब देना होगा। सरकार ने यह भी कहा कि मामले की पूरी प्रक्रिया में अंकिता के परिवार की भावनाओं को प्राथमिकता दी गई। परिवार की मांग के आधार पर सरकारी वकीलों में भी बदलाव किया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, सरकारी वकील तीन बार बदले गए।
CBI जांच की मांग पर भी सरकार का दावा
अंकिता भंडारी के माता-पिता ने मामले की CBI जांच की मांग की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, परिवार की मांग का सम्मान करते हुए सरकार ने CBI जांच का आदेश दिया था। इसके अलावा परिवार को आर्थिक सहायता के रूप में 25 लाख रुपये दिए गए। सरकार का दावा है कि परिवार के एक सदस्य को नौकरी देकर भी उनकी मदद की गई। मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा कि सरकार ने परिवार से किए गए अपने वादों को पूरा करने की कोशिश की है।
‘VIP’ मुद्दे पर राजनीति न करने की अपील
मुख्यमंत्री कार्यालय ने अंकिता भंडारी मामले में तथाकथित ‘VIP’ के मुद्दे को लेकर हो रही राजनीतिक बयानबाजी पर भी प्रतिक्रिया दी। सरकार ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन के पास इस संबंध में कोई ठोस तथ्य या सबूत हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों या अदालत के सामने पेश किया जाना चाहिए। सरकार का आरोप है कि बिना ठोस सबूत के अदालत के बाहर लगातार बयानबाजी करने से जनता के बीच भ्रम पैदा होता है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसे एक संवेदनशील मामले का राजनीतिकरण बताया।
सरकार ने दोहराया अपना रुख
धामी सरकार ने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए गिरफ्तारी, SIT जांच, चार्जशीट, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई, अभियोजन की व्यवस्था में बदलाव, परिवार को आर्थिक सहायता और नौकरी जैसे कदम उठाए गए। अब हाईकोर्ट द्वारा आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद सरकार ने एक बार फिर कहा है कि वह मामले में कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।