KNEWS DESK- दिल्ली के मालवीय नगर में हुए दर्दनाक होटल अग्निकांड के बीच कुछ ऐसे चेहरे भी सामने आए, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जिंदगी बचाने की कोशिश की। जब होटल की ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोग मदद के लिए चीख रहे थे, तब पास में गद्दे और रजाई की दुकान चलाने वाले रियाजुद्दीन मंसूरी और उनके परिवार ने इंसानियत की मिसाल पेश की।
आग लगने की खबर मिलते ही रियाजुद्दीन और उनका बेटा अरमान मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि कई लोग होटल की खिड़कियों से बाहर झांक रहे हैं और जान बचाने के लिए नीचे कूदने की सोच रहे हैं। ऐसे में बिना देर किए उन्होंने अपनी दुकान से दर्जनों गद्दे और रजाइयां निकालकर होटल के बाहर बिछा दीं।
अरमान के मुताबिक, उन्होंने करीब 20 से 25 गद्दे और रजाइयां एक के ऊपर एक रखकर एक तरह का सुरक्षा कवच तैयार किया। इसका फायदा यह हुआ कि होटल में फंसे कई लोग ऊपर से कूदकर अपनी जान बचाने में सफल रहे। बताया जा रहा है कि कम से कम 8 लोगों की जान इन्हीं गद्दों की वजह से बच सकी।
सिर्फ इतना ही नहीं, आसपास के लोगों ने भी राहत कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कुछ लोगों ने खिड़कियों के शीशे तोड़ने के लिए ईंटें फेंकी, तो कुछ ने पड़ोसी मकानों से रस्सियां डालकर लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की। धुएं और आग के बीच यह पूरा इलाका मानो एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में बदल गया था।
रियाजुद्दीन का कहना है कि इस दौरान उन्हें करीब 2 लाख रुपये का नुकसान हुआ, लेकिन उन्हें इसका कोई अफसोस नहीं है। उन्होंने कहा कि उस समय सबसे जरूरी लोगों की जान बचाना था। उनके शब्दों में, “इंसानियत सबसे ऊपर है, जरूरत के वक्त मदद करना ही हमारा फर्ज है।”
मालवीय नगर होटल अग्निकांड में 21 लोगों की जान चली गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। इस दर्दनाक हादसे के बीच रियाजुद्दीन और उनके परिवार की बहादुरी और इंसानियत की कहानी लोगों के दिलों को छू रही है।