रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को सिक्किम में भारत-चीन सीमा के पास नाथुला दर्रे के नजदीक शेराथांग युद्ध स्मारक पर भारतीय सेना के जवानों के साथ दिवाली मनाई। इस दौरान उन्होंने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी और सैनिकों के साहस, अनुशासन, समर्पण और बलिदान की सराहना की।
Knews Desk – दिवाली के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सिक्किम के शेराथांग युद्ध स्मारक पर सैनिकों के साथ त्योहार मनाया। उन्होंने युद्ध स्मारक पर देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि दी और सैनिकों तथा उनके परिवारों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि देशवासी अपने घरों में दिवाली के दीये सैनिकों के बलिदान की वजह से जला पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जवानों ने देश और समाज की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है और उनके परिवार भी सम्मान और शुभकामनाओं के हकदार हैं।
जवानों के उत्साह और जज्बे की सराहना
रक्षा मंत्री ने सैनिकों से बातचीत के दौरान उनके उत्साह और जज्बे की तारीफ की। उन्होंने कहा कि जवानों से मिले अपनापन और ऊर्जा को शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है और उन्हें सैनिकों के चेहरों, उत्साह और जज्बे पर गर्व है।
राजनाथ सिंह ने जवानों की तुलना दिवाली के दीये से करते हुए कहा कि जिस तरह दीया बिना शोर किए अंधेरे से लड़ता है, उसी तरह सैनिक भी बिना शोर किए देश की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने कहा कि जब पूरा देश त्योहार मना रहा होता है, तब भी जवान सीमाओं पर नजर रखते हैं और उनकी वजह से देश के नागरिक चैन से सो पाते हैं।
रक्षा मंत्री ने तकनीकी प्रगति के साथ अनुशासन के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो, अगर युवाओं में अनुशासन नहीं है तो तकनीक अपने आप में बेकार हो जाती है। उन्होंने सैनिकों के अनुशासन को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताया।
शहीदों के बलिदान को याद दिलाते हैं युद्ध स्मारक
राजनाथ सिंह ने कहा कि शेराथांग जैसे युद्ध स्मारक आने वाली पीढ़ियों को सैनिकों की वीरता और बलिदान की याद दिलाते हैं। उन्होंने बताया कि शेराथांग में शहीद होने वाले सैनिक देश के अलग-अलग हिस्सों से आए थे, लेकिन भारत माता की सेवा और देश की रक्षा के संकल्प ने उन्हें एक सूत्र में बांधा था।
रक्षा मंत्री ने नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां देश की सुरक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों के लगभग 26 हजार नाम सुनहरे अक्षरों में अंकित हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे स्मारक आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रीय गौरव और देश के प्रति प्रतिबद्धता की भावना से प्रेरित करते रहेंगे।