KNEWS DESK- CJP (कैंपेन फॉर जस्टिस एंड पीस) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उन्हें और उनके परिवार को कई बार पार्टी में शामिल होने का दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें धमकी दी गई कि यदि उन्होंने बीजेपी जॉइन नहीं की तो उनके परिवार के लिए हालात अच्छे नहीं होंगे। दिपके ने सरकार पर युवाओं, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया।
अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्हें यह देखकर आश्चर्य होता है कि देश के शीर्ष नेता उनसे डरने लगे हैं। उन्होंने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के पोते की उम्र का हूं, फिर भी मुझे और मेरे परिवार को डराने-धमकाने की कोशिश की गई।” उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी का पूरा ध्यान केवल सत्ता हासिल करने और उसे बनाए रखने पर है, जबकि युवाओं, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार जैसे अहम मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा और रोजगार का संकट लगातार बढ़ रहा है, लेकिन सरकार इन मुद्दों पर गंभीर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक लाभ लेने में लगी हुई है। उनके मुताबिक, यदि देश के भविष्य को मजबूत बनाना है तो युवाओं से जुड़े मुद्दों पर प्राथमिकता से काम करना होगा।
दिपके ने बीजेपी पर अपराधियों को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी में ऐसे लोगों का स्वागत किया जाता है जिन पर गंभीर आपराधिक आरोप रहे हैं। उन्होंने कुछ चर्चित मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे लोगों का सार्वजनिक सम्मान किया गया, जो समाज के लिए गलत संदेश देता है। उनके मुताबिक, शिक्षा व्यवस्था का भविष्य ऐसे लोगों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया बयानों का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें राहुल गांधी की कई बातें सही लगती हैं। दिपके ने कहा कि युवाओं, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि पूरे देश को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था उन सभी लोगों के साथ खड़ी है जो शिक्षा, रोजगार और युवाओं के अधिकारों की बात करते हैं।
बिहार में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर भी दिपके ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां गृह मंत्रालय के अधीन काम करती हैं, इसलिए छात्रों पर पेलेट गन का इस्तेमाल गृह मंत्री की जानकारी के बिना संभव नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा उनकी जानकारी के बिना हुआ है, तो इसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
दिपके ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने कहा कि जिन हथियारों का इस्तेमाल आतंकवादियों से निपटने के लिए किया जाता है, उनका उपयोग छात्रों पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि छात्रों के साथ हुई किसी भी तरह की कथित ज्यादती की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध प्रदर्शन को दबाने के बजाय संवाद के जरिए समाधान निकालना चाहिए। युवाओं की आवाज को सुनना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी है।