उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी की ओर से राम गोपाल यादव और धनराज नाथवानी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद AIMIM ने अखिलेश यादव और सपा पर निशाना साधा है। AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता एडवोकेट शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि सपा मुसलमानों का वोट लेकर बीजेपी समर्थित लोगों को राज्यसभा भेज रही है। उन्होंने धनराज नाथवानी को प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर गुजरात और सैफई के बीच कथित राजनीतिक संबंधों पर सवाल उठाए हैं।
Knews Desk- शादाब चौहान ने बीजेपी-NDA समर्थित सांसद परिमल नाथवानी के बेटे धनराज नाथवानी को सपा की ओर से राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने इसे “गुजरात और सैफई का रिश्ता” बताते हुए पूछा कि आखिर यह किस तरह की “मैच-फिक्सिंग” है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या यह कथित डील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर हुई या फिर अपर्णा यादव के जरिए हुई।
AIMIM प्रवक्ता ने सपा के मुस्लिम विधायकों को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने उन्हें “सियासी संविदा कर्मी” बताते हुए आरोप लगाया कि उनसे केवल पार्टी के फैसलों से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए जाते हैं। शादाब चौहान ने दावा किया कि मुसलमानों को केवल वोट देने वाली मशीन के तौर पर इस्तेमाल किया गया, जबकि अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और राजनीतिक हिस्सेदारी जैसे मुद्दों पर उन्हें नजरअंदाज किया गया।
शादाब चौहान ने समाजवादी पार्टी की धर्मनिरपेक्षता पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, सपा की कथित धर्मनिरपेक्ष राजनीति का वास्तविक चेहरा अब सामने आ गया है और उत्तर प्रदेश का मुसलमान इस राजनीतिक रवैये को समझ चुका है।
इससे पहले बुधवार को राज्यसभा चुनाव के लिए सपा के दोनों उम्मीदवार राम गोपाल यादव और धनराज नाथवानी ने अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, शिवपाल यादव और सपा के कई विधायक मौजूद रहे। धनराज नाथवानी मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मौजूदा संख्या-बल के आधार पर बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन के 8 सीटें जीतने की संभावना है, जबकि कांग्रेस के समर्थन से समाजवादी पार्टी 2 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। हालांकि, सपा की ओर से तीसरा प्रत्याशी उतारे जाने की चर्चा भी है।
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। इनमें 9 सीटों के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इन सदस्यों में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा के अलावा बीजेपी नेता अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल और सीमा द्विवेदी शामिल हैं। इनके साथ राम गोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।
इसके अलावा राज्यसभा की 10वीं सीट पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा के अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल बनाए जाने के बाद राज्यसभा से इस्तीफा देने के कारण खाली हुई है। हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा केंद्रीय मंत्री हैं और उन्हें मंत्री पद पर बने रहने के लिए संसद के किसी भी सदन का सदस्य होना जरूरी है।
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक, राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। 16 अक्टूबर को मतदान होगा और इसी दिन मतगणना भी की जाएगी।