रूस में नौकरी के लिए रूस पहुंचे तेलंगाना के 4 युवक फंसे, परिवारों का दावा- सेना में भेजा गया

तेलंगाना के चार युवक रूस में नौकरी करने गए थे, लेकिन परिवारों का आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद उन्हें रूसी सेना में सेवा के लिए भेज दिया गया। परिजनों के मुताबिक, इनमें से कुछ युवकों को यूक्रेन से सटी युद्ध क्षेत्र की फ्रंटलाइन के पास भी भेजे जाने की जानकारी मिली है। परिवारों ने राज्य सरकार और भारतीय अधिकारियों से हस्तक्षेप कर युवकों को सुरक्षित भारत वापस लाने की मांग की है।

Knews Desk– परिवारों के अनुसार, चारों युवकों को रूस में सामान्य और मैकेनिकल हेल्पर के तौर पर काम करने का प्रस्ताव मिला था। नौकरी के विज्ञापन में करीब 477 डॉलर मासिक वेतन के साथ मुफ्त भोजन की सुविधा का उल्लेख किया गया था। साथ ही बताया गया था कि नौकरी के लिए रूसी भाषा की परीक्षा देना जरूरी नहीं होगा। इसी जानकारी के आधार पर युवक रूस पहुंचे थे। परिजनों का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि रूस पहुंचने के बाद युवकों को सैन्य सेवा के लिए भेजा जा सकता है।

तेलंगाना के एक युवक प्रकाश की पत्नी मेघावत सुनीता के मुताबिक, प्रकाश रूस में नौकरी की उम्मीद लेकर गया था। रूस पहुंचने के बाद उसने एक सैन्य कैंप से परिवार से केवल एक बार बातचीत की। परिवार का कहना है कि उसका फोन भी ले लिया गया है और उसकी सुरक्षा को लेकर परिजन चिंतित हैं। प्रकाश के परिवार में उसकी पत्नी और तीन बच्चे हैं। उसके साले लाउड्या रवि ने बताया कि प्रकाश फिलहाल एक सैन्य कैंप में है। परिवार के मुताबिक, समूह के दो अन्य युवकों को भी फ्रंटलाइन के करीब भेजे जाने की जानकारी मिली है।

निजामाबाद जिले के तदकोले गांव के रहने वाले मोहम्मद अफजान खान के परिवार ने भी सरकार से मदद की अपील की है। परिवार के अनुसार, रूस जाने के बाद अफजान की ओर से कुछ परेशान करने वाले वॉइस मैसेज मिले। उसकी पत्नी जमीला बेगम ने बताया कि इन संदेशों को सुनने के बाद पूरा परिवार चिंतित है। अफजान 15 फरवरी को रूस गया था। उसके परिवार में पत्नी, दो बच्चे और पिता अब्बास खान हैं।

वहीं, रविंदर के परिवार ने बताया कि उसके दो बेटे नितिन और अरविंद उस पर निर्भर हैं। परिवार का कहना है कि मौजूदा स्थिति उनके लिए बेहद चिंता का विषय बनी हुई है और वे अपने परिजन की सुरक्षित वापसी चाहते हैं।

चारों परिवारों ने 29 सितंबर को हैदराबाद में मुख्यमंत्री प्रवासी प्रजावाणी के अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत दर्ज कराई। इससे पहले निजामाबाद ग्रामीण विधायक आर भूपति रेड्डी ने भी इस मामले को उठाया था। परिवारों की ओर से विदेश मंत्रालय के MADAD पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई है।

प्रवासी प्रजावाणी की अधिकारी गडवाल विजयलक्ष्मी और नोडल अधिकारी के विद्यासागर ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। अधिकारियों ने राज्य के एनआरआई विंग को विदेश मंत्रालय और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के साथ समन्वय करने के निर्देश दिए हैं। शिकायत को सामान्य प्रशासन विभाग के एनआरआई सेल को भी भेजा गया है।

परिवारों ने सरकार को युवकों की भर्ती से जुड़े दस्तावेज भी सौंपे हैं। इनमें रूस की Pondera Co. के जरिए सामान्य और मैकेनिकल हेल्पर की नौकरियों से संबंधित विज्ञापन शामिल हैं। ओड्डे येल्लैया से जुड़े दस्तावेजों में उन्हें Pondera Industry LLC का भारतीय सिविलियन कर्मचारी बताया गया है। वहीं, उनके वर्क परमिट में उनका काम औद्योगिक पाइपलाइन इंस्टॉलर के तौर पर दर्ज है।

परिजनों का कहना है कि युवक रूस में सिविलियन नौकरी करने के इरादे से गए थे, लेकिन अब वे युद्ध से जुड़े सैन्य हालात में फंस गए हैं। परिवारों ने सरकार और भारतीय अधिकारियों से चारों युवकों की मौजूदा स्थिति का पता लगाने और उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए कदम उठाने की मांग की है।

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