आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ट्रांसफर हुई याचिका

knews desk – समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने आजम खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलीलें रखीं। सिब्बल ने आजम खान की उम्र, उनके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या और कथित घटना के कई साल बाद FIR दर्ज किए जाने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने इसे उत्पीड़न का मामला बताते हुए पूछा कि 2006 की घटना के लिए 2019 में FIR कैसे दर्ज की जा सकती है और इसमें PMLA का मामला कैसे जुड़ गया।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय देने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने का फैसला किया और हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि छुट्टियों के बाद अदालत खुलने के पहले ही दिन, यानी 16 नवंबर तक इस मामले पर सुनवाई की जाए।

‘मेरे मुवक्किल 80 साल के हैं, 28 मामले और एक ECIR’

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने आजम खान का पक्ष रखते हुए कहा कि उनके मुवक्किल की उम्र 80 साल है, उनके खिलाफ 28 मामले दर्ज हैं और एक ECIR भी है। सिब्बल ने इसे पूरी तरह उत्पीड़न का मामला बताया। उन्होंने दलील दी कि जिस घटना का संबंध 2006 से बताया जा रहा है, उसमें 2019 में FIR दर्ज की गई, जबकि उस समय आजम खान सत्ता में नहीं थे।

सिब्बल ने सवाल उठाया कि 2006 की किसी घटना को लेकर 13 साल बाद FIR कैसे दर्ज की जा सकती है। उन्होंने अदालत से इस मामले पर विचार करने का आग्रह किया।

इस पर CJI ने कहा कि आजम खान की ओर से उठाई गई दलीलों में कुछ दम हो सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस स्तर पर मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं देना चाहता। अदालत ने याचिका को हाईकोर्ट भेजने की बात कही।

‘2006 की घटना, 2019 में FIR, PMLA कैसे आ गया?’

कपिल सिब्बल ने कहा कि अदालत जो भी आदेश देगी, वह उसे स्वीकार करेंगे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट को मामले पर एक बार नजर जरूर डालनी चाहिए। उन्होंने फिर सवाल उठाया कि घटना 2006 की है और FIR 2019 में दर्ज हुई। ऐसे में इस मामले में PMLA कैसे आ गया।

सिब्बल की दलीलों के जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़ी आयकर विभाग की कुछ कार्यवाहियों का जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि इन कार्यवाहियों के दौरान बड़ी मात्रा में ऐसी धनराशि मिली, जिसका हिसाब-किताब नहीं था। अदालत के मुताबिक, यह धनराशि विश्वविद्यालय के प्रबंधन से जुड़ी थी और विश्वविद्यालय इस कथित जबरन वसूली के रैकेट का लाभार्थी था।

जेल से रिहाई के बाद FIR दर्ज होने की दलील

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान आजम खान की ओर से दी गई दलील का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता का कहना है कि जेल से छूटने के तुरंत बाद आर्थिक अपराध शाखा यानी EOW ने FIR दर्ज कर ली।

कोर्ट ने मामले की मुख्य वजह विश्वविद्यालय में फंड के कथित कुप्रबंधन को बताया। साथ ही आयकर विभाग की कार्यवाही में मिली बेहिसाब धनराशि और विश्वविद्यालय के प्रबंधन से जुड़े पहलुओं का भी उल्लेख किया।

अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान की याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने का फैसला सुनाया। अदालत ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि छुट्टियों के बाद अदालत खुलने के पहले दिन, यानी 16 नवंबर तक इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

अब आजम खान को अपनी दलीलें इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने रखनी होंगी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी है।

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