अमेरिका में फिर बदलेगा समय! जानिए क्या है डेलाइट सेविंग टाइम और भारत में क्यों नहीं होता लागू

Knews Desk- अमेरिका एक बार फिर डेलाइट सेविंग टाइम (Daylight Saving Time-DST) को लेकर नया कानून लाने की तैयारी में है। इस संबंध में सनशाइन प्रोटेक्शन एक्ट (Sunshine Protection Act) नाम का बिल पेश किया जा चुका है, जिसे अभी सीनेट की मंजूरी मिलनी बाकी है। यदि यह बिल पारित हो जाता है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसके बाद इस पर हस्ताक्षर करते हैं, तो अमेरिका में समय बदलने की व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि इस प्रस्ताव का देश में समर्थन और विरोध दोनों हो रहे हैं।डेलाइट सेविंग टाइम, जिसे संक्षेप में DST कहा जाता है, ऐसी व्यवस्था है जिसमें दिन की प्राकृतिक रोशनी का अधिकतम उपयोग करने के लिए साल में दो बार घड़ियों का समय बदला जाता है। गर्मियों की शुरुआत में घड़ी को एक घंटा आगे कर दिया जाता है, जिसे ‘स्प्रिंग फॉरवर्ड’ कहा जाता है। इससे लोगों को शाम के समय एक घंटा अधिक उजाला मिलता है। वहीं सर्दियों की शुरुआत में घड़ी को एक घंटा पीछे कर दिया जाता है, जिसे ‘फॉल बैक’ कहा जाता है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि डेलाइट सेविंग टाइम से सूर्योदय या सूर्यास्त का वास्तविक समय नहीं बदलता। केवल घड़ी का समय और लोगों की दिनचर्या बदली जाती है ताकि दिन की रोशनी का अधिक प्रभावी तरीके से उपयोग किया जा सके। इस व्यवस्था का उद्देश्य बिजली की बचत, ऊर्जा की खपत कम करना और शाम के समय लोगों को अधिक प्राकृतिक रोशनी उपलब्ध कराना है।हालांकि डेलाइट सेविंग टाइम को लेकर मतभेद भी हैं। इसके समर्थकों का कहना है कि इससे ऊर्जा की बचत होती है, सड़क दुर्घटनाएं कम हो सकती हैं और लोग शाम के समय अधिक सक्रिय रहते हैं। वहीं विरोध करने वालों का तर्क है कि बार-बार समय बदलने से लोगों की जैविक घड़ी (Body Clock) प्रभावित होती है, जिससे नींद, स्वास्थ्य और कामकाज पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

भारत में डेलाइट सेविंग टाइम लागू क्यों नहीं होता? इसका सबसे बड़ा कारण देश की भौगोलिक स्थिति है। भारत भूमध्य रेखा (Equator) के अपेक्षाकृत करीब स्थित है, इसलिए यहां सालभर दिन और रात की अवधि में बहुत अधिक अंतर नहीं आता। गर्मियों और सर्दियों में दिन की लंबाई में केवल मामूली बदलाव होता है। ऐसे में घड़ी का समय बदलने से कोई खास फायदा नहीं मिलता। यही वजह है कि भारत पूरे देश में इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) का पालन करता है और पूरे साल घड़ियों का समय एक जैसा रहता है।

इसके विपरीत अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कई देश उच्च अक्षांश (High Latitude) वाले क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां गर्मियों में दिन काफी लंबे और सर्दियों में बेहद छोटे होते हैं। इसलिए वहां डेलाइट सेविंग टाइम को उपयोगी माना जाता है। हालांकि अमेरिका के कुछ राज्य, जैसे हवाई और एरिजोना (अधिकांश हिस्सा), आज भी इस व्यवस्था को लागू नहीं करते।यदि अमेरिका में सनशाइन प्रोटेक्शन एक्ट कानून बन जाता है, तो यह वहां समय बदलने की मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। दुनिया के कई देशों में डेलाइट सेविंग टाइम आज भी लागू है, लेकिन भारत की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए निकट भविष्य में इसके लागू होने की संभावना बेहद कम मानी जाती है।

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