Ulta Garha Dham: 200 साल पुराना इतिहास, 56 फीट ऊंचे बजरंगबली… जानिए गौरीगंज के उल्टा गढ़ा धाम की कहानी

Knews Desk- उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के गौरीगंज में स्थित उल्टा गढ़ा हनुमान धाम अपनी धार्मिक मान्यताओं और इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। बताया जाता है कि इस स्थान का इतिहास करीब 200 साल पुराना है। मंदिर परिसर में स्थापित हनुमान जी की 56 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा यहां आने वाले श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। हर मंगलवार को यहां मेले जैसा माहौल रहता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु बजरंगबली के दर्शन करने पहुंचते हैं।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, करीब 200 साल पहले इस इलाके में राजा रक्तंभ सिंह का शासन था। उन्हें भगवान राम के वंश से जुड़ा माना जाता था। कहा जाता है कि उस समय यहां एक किला मौजूद था, जो भूकंप के कारण बुरी तरह उलट-पुलट हो गया था। इसी घटना के बाद इस स्थान को ‘उल्टा गढ़ा’ के नाम से जाना जाने लगा।

बताया जाता है कि पुराने किले से जुड़े मेहराब और अन्य अवशेषों की जानकारी शासन-प्रशासन के साथ पुरातत्व विभाग को भी दी गई थी। यही ऐतिहासिक मान्यता इस धार्मिक स्थल को और खास बनाती है।

56 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा

उल्टा गढ़ा हनुमान धाम की सबसे बड़ी पहचान यहां स्थापित बजरंगबली की 56 फीट ऊंची प्रतिमा है। दूर से ही दिखाई देने वाली यह विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचती है। हर मंगलवार यहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मान्यता है कि सच्चे मन से बजरंगबली के सामने मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। अपनी मुराद पूरी होने के बाद कई श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर लड्डू का प्रसाद चढ़ाते हैं और भगवान हनुमान का आभार व्यक्त करते हैं। हनुमान धाम की एक और खासियत यहां बड़ी संख्या में मौजूद बंदर हैं। मंदिर आने वाले श्रद्धालु बंदरों को चना, गुड़, पूरी और लड्डू खिलाते हैं। मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में बंदरों का जमावड़ा अक्सर देखने को मिलता है।

2007 में रखी गई थी मंदिर की आधारशिला

स्थानीय निवासी गोबिंद सिंह के मुताबिक, इस स्थान पर मंदिर की आधारशिला 2 जून 2007 को रखी गई थी। इसके बाद 9 जून 2009 को मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कराई गई। समय के साथ मंदिर परिसर का लगातार विस्तार हुआ और यहां अलग-अलग देवी-देवताओं के मंदिर भी स्थापित किए गए।

जंगल के बीच स्थित यह धार्मिक स्थल प्राकृतिक वातावरण के कारण भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। मंगलवार को यहां विशेष चहल-पहल रहती है और मेले जैसा दृश्य देखने को मिलता है।

पर्यटन स्थल बनाने की उठ रही मांग

उल्टा गढ़ा हनुमान धाम की धार्मिक मान्यता और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग भी लंबे समय से की जा रही है। मंदिर के पुजारी धीरू महाराज और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यहां पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं का विकास किया जाए तो दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलने के साथ क्षेत्र को भी नई पहचान मिल सकती है।

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