RSS प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में Gen Z और Gen Alpha के छात्रों के साथ संवाद के दौरान समलैंगिक विवाह, छात्र आंदोलनों, शिक्षा व्यवस्था और पाकिस्तान-चीन जैसे कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। समलैंगिक विवाह को लेकर उन्होंने कहा कि LGBT समुदाय समाज का हिस्सा है, लेकिन विवाह और परिवार से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव करते समय सामाजिक स्वीकार्यता और उचित कानूनी ढांचे का ध्यान रखना जरूरी है।
Knews Desk– राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को मुंबई में Gen Z और Gen Alpha के छात्रों के साथ बातचीत की। इस दौरान छात्रों ने उनसे सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े कई सवाल पूछे। समलैंगिक विवाह को लेकर पूछे गए सवाल पर भी भागवत ने विस्तार से अपनी बात रखी।
मोहन भागवत ने कहा कि LGBT समुदाय समाज का ही हिस्सा है। भारतीय समाज में विवाह लंबे समय से एक सामाजिक संस्था के रूप में मौजूद है और परिवार को समाज की मूल इकाई माना जाता है। अगली पीढ़ी इसी पारिवारिक व्यवस्था से समाज का हिस्सा बनती है।
उन्होंने कहा कि वर्षों से चली आ रही किसी व्यवस्था में बदलाव करते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि उससे सामाजिक टकराव की स्थिति पैदा न हो। यदि मौजूदा व्यवस्था को बदला जाता है तो उसके स्थान पर ऐसी नई व्यवस्था भी होनी चाहिए, जिसे समाज स्वीकार कर सके।
भागवत के मुताबिक, समलैंगिक विवाह जैसे विषय पर कानून और सामाजिक व्यवस्था के बीच तालमेल जरूरी है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए और बदलाव का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे समाज सहज रूप से आगे बढ़ सके।
छात्र आंदोलन को बताया संवाद का माध्यम
छात्र आंदोलनों को लेकर RSS प्रमुख ने कहा कि आंदोलन भी अपनी बात सामने रखने और संवाद करने का एक तरीका है। लोकतंत्र में जब लोगों को लगता है कि उनकी चिंताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है, तब आंदोलन के जरिए अपनी आवाज सरकार और व्यवस्था तक पहुंचाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि बातचीत से बेहतर परिणाम निकल सकते हैं। किसी मुद्दे को केवल बहस तक सीमित रखने के बजाय संवाद और आम सहमति बनाने की कोशिश होनी चाहिए।
‘Gen Z की शिकायतों को समझना जरूरी’
मोहन भागवत ने Gen Z को लेकर कहा कि नई पीढ़ी को सीधे देश-विरोधी कहना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, युवा अपनी समस्याओं और सवालों को लेकर आवाज उठा रहे हैं और उनकी बात को सुनने की जरूरत है। उन्होंने भारतीय शिक्षा व्यवस्था में भी सुधार की आवश्यकता बताई। भागवत ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है और इसके लिए नई पीढ़ी के साथ लगातार संवाद होना चाहिए।
भागवत ने कहा कि पहले की पीढ़ियां अक्सर अपने बड़ों की बात बिना ज्यादा सवाल किए मान लेती थीं, लेकिन आज की Gen Z और Gen Alpha हर बात के पीछे का कारण जानना चाहती है। उनके अनुसार, युवाओं के सवालों से बचने के बजाय उनके साथ ऐसा रिश्ता और संवाद कायम किया जाना चाहिए, जिसमें उन्हें अपने सवालों के जवाब मिल सकें। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण बताया।
पाकिस्तान और चीन को लेकर भी रखी बात
पाकिस्तान और चीन से जुड़े सवालों पर मोहन भागवत ने कहा कि किसी संकट या टकराव की स्थिति में देश के नागरिकों को सरकार के निर्देशों के साथ खड़ा होना चाहिए। साथ ही उन्होंने बातचीत और मानवीय दृष्टिकोण को भी महत्वपूर्ण बताया।
भागवत ने कहा कि किसी देश या समाज को हमेशा के लिए दुश्मन मानकर नहीं चला जा सकता। टकराव के बाद भी बातचीत का रास्ता खुला रहना चाहिए। पाकिस्तान को लेकर उन्होंने ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया और कहा कि राजनीतिक तथा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के बावजूद इंसानियत को महत्व दिया जाना चाहिए।
‘Gen Z देश-विरोधी नहीं’
RSS प्रमुख ने कहा कि वह यह नहीं मानते कि Gen Z को विरोध नहीं करना चाहिए। हालांकि, विरोध का तरीका संवैधानिक और लोकतांत्रिक होना चाहिए। उन्होंने युवाओं को संविधान में बताए गए लोकतांत्रिक तरीकों को समझने की सलाह दी।
भागवत ने कहा कि अगर नई पीढ़ी आवाज उठा रही है तो उसकी वजहों को समझना चाहिए। युवा इसी देश और समाज की अगली पीढ़ी हैं, इसलिए उनके साथ जुड़ाव और संवाद बनाए रखना जरूरी है।
छात्रों पर लाठीचार्ज पर क्या कहा?
छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज से जुड़े सवाल पर भागवत ने कहा कि उनके पास घटना की पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि खबरों में कुछ बाहरी लोगों के समूह में शामिल होने की बात सामने आई है, लेकिन वह इसकी पुष्टि नहीं कर सकते।
उन्होंने नई पीढ़ी पर भरोसा जताते हुए कहा कि अगर उन्हें बिना पूरी जानकारी के किसी एक पक्ष पर विश्वास करना हो, तो वह Gen Z पर भरोसा करना पसंद करेंगे।