उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत कई राज्यों में विधान परिषद (MLC) के चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी वजह केवल परंपरा नहीं, बल्कि चुनाव की प्रकृति और मतदान की निर्धारित प्रक्रिया भी है। विधान परिषद की अलग-अलग श्रेणियों की सीटों के लिए चुनाव में मतदाताओं और वोटों की गणना का तरीका सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग हो सकता है।
Knews Desk – विधानसभा चुनाव में आम मतदाता अपने निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार को वोट देता है। वहीं, विधान परिषद की सीटों के लिए चुनाव सीट की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग मतदाता समूहों के जरिए कराया जाता है। इनमें स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि, विधानसभा के सदस्य, स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता शामिल हो सकते हैं।
विधान परिषद की कुछ सीटों पर चुनाव में मतदाताओं को उम्मीदवारों के लिए अपनी प्राथमिकता क्रम से दर्ज करनी होती है। इस प्रक्रिया में बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, सभी MLC सीटों के चुनाव में मतदाता समूह और मतदान की प्रक्रिया एक जैसी नहीं होती।
बैलेट पेपर से मतदान की क्या है वजह?
विधान परिषद के चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल संबंधित चुनाव की कानूनी और निर्धारित मतदान प्रक्रिया के अनुरूप किया जाता है। खासकर प्राथमिकता क्रम के आधार पर मतदान वाली व्यवस्था में मतदाता बैलेट पेपर पर उम्मीदवारों के सामने अपनी पसंद का क्रम दर्ज करते हैं।
ऐसे चुनावों में मतों की वैधता और प्राथमिकताओं की गणना के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी होता है। इसलिए MLC चुनाव में बैलेट पेपर का इस्तेमाल चुनाव की प्रकृति और लागू प्रक्रिया से जुड़ा है, न कि केवल EVM के उपलब्ध न होने से।
प्राथमिकता क्रम से कैसे चुना जाता है उम्मीदवार?
विधान परिषद की कुछ सीटों पर आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) का इस्तेमाल होता है। इसमें मतदाता उम्मीदवारों के सामने अपनी प्राथमिकता दर्ज करता है। पहली पसंद के वोटों की गिनती के बाद निर्धारित कोटा और चुनाव नियमों के अनुसार जरूरत पड़ने पर दूसरी या आगे की प्राथमिकताओं को भी गिना जा सकता है।
यह प्रक्रिया सामान्य विधानसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को वोट देने की व्यवस्था से अलग है। इसी वजह से इन चुनावों में मतपत्र भरने और मतगणना के लिए विशेष नियम निर्धारित हैं।
विधान परिषद के चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल चुनाव की संबंधित श्रेणी और लागू नियमों के अनुसार होता है। यह कहना सही नहीं होगा कि हर तरह के चुनाव में एक ही प्रक्रिया लागू होती है। चुनाव आयोग के निर्देश और संबंधित कानून यह तय करते हैं कि मतदान किस तरीके से कराया जाएगा।
EVM और बैलेट पेपर में क्या अंतर है?
EVM में मतदाता मशीन पर बटन दबाकर अपना वोट दर्ज करता है, जबकि बैलेट पेपर में मतदाता कागज पर निर्धारित तरीके से अपनी पसंद दर्ज करता है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, EVM से मतदान में गलत निशान लगाने के कारण वोट अमान्य होने की समस्या नहीं होती और मतगणना भी अपेक्षाकृत जल्दी हो सकती है। दूसरी ओर, बैलेट पेपर में मतपत्रों की मैन्युअल जांच और गिनती करनी पड़ती है।
इस तरह MLC चुनाव में बैलेट पेपर का इस्तेमाल चुनाव की कानूनी व्यवस्था, सीट की श्रेणी और मतदान प्रणाली से जुड़ा है। इसे केवल EVM के इस्तेमाल से बचने के फैसले के रूप में देखना सही नहीं होगा।