Knews Desk- दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओं से जुड़े विस्तृत रिकॉर्ड सार्वजनिक करने के केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी जानकारी का खुलासा राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रधानमंत्री की जान की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 15 अक्टूबर को दिए अपने आदेश में केंद्रीय सूचना आयोग के उस निर्देश को रद्द कर दिया, जिसमें भारतीय वायु सेना को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत प्रधानमंत्रियों की विदेश यात्राओं से संबंधित विशेष फ्लाइट रिटर्न्स (SFR) पार्ट-II के रिकॉर्ड की प्रमाणित कॉपी उपलब्ध कराने को कहा गया था।
जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ यात्रा करने वाले विमान, एयरक्रू, पूरे प्रतिनिधिमंडल और विशेष सुरक्षा समूह (SPG) के सदस्यों से जुड़ी जानकारी का खुलासा राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। कोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री की सुरक्षा से संबंधित मामलों में सक्षम सुरक्षा एजेंसियों के आकलन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत या CIC सुरक्षा एजेंसियों के आकलन की जगह अपना आकलन नहीं रख सकते।
यह मामला जून 2018 में रिटायर्ड कमोडोर लोकेश बत्रा की ओर से दायर RTI आवेदन से जुड़ा है। उन्होंने अप्रैल 2013 से जून 2018 के बीच भारतीय वायु सेना के विमानों से प्रधानमंत्रियों की विदेश यात्राओं का विवरण मांगा था। वायु सेना ने कुछ यात्राओं की जानकारी दी, लेकिन सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए SFR पार्ट-I और पार्ट-II का विस्तृत रिकॉर्ड देने से इनकार कर दिया।
इसके बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने सुरक्षा कर्मियों के नाम हटाकर संबंधित SFR-II रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतियां देने का निर्देश दिया था। वायु सेना के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
बत्रा के वकील ने दलील दी कि मांगी गई जानकारी प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर होने वाले सार्वजनिक खर्च से संबंधित है और इसे सार्वजनिक हित में उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुरोध का उद्देश्य सुरक्षा कर्मियों की पहचान उजागर करना नहीं, बल्कि सरकारी खर्च पर यात्रा करने वाले निजी व्यक्तियों से जुड़ी जानकारी प्राप्त करना था।
हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि केवल सरकारी धन खर्च होने के आधार पर ऐसी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती, जिससे यात्राओं के दौरान किए गए सुरक्षा इंतजाम प्रभावित हो सकते हैं। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि CIC ने SFR-II रिकॉर्ड के खुलासे का निर्देश देकर गलती की थी। इसी आधार पर आयोग का आदेश रद्द कर दिया गया।