ममता बनर्जी का ज्ञानेश कुमार पर बड़ा हमला, गिरफ्तारी और आपराधिक कार्रवाई की मांग, देशव्यापी आंदोलन का ऐलान

Knews Desk – मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। चुनाव आयोग के दो आयुक्तों की ओर से कथित तौर पर कुछ फैसलों और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मामलों पर आपत्ति जताए जाने की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। इसी बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।

ममता बनर्जी ने बुधवार को अपने वर्चुअल संबोधन में कहा कि उनकी पहली मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा और इस मुद्दे पर INDIA गठबंधन के नेता जल्द बैठक करेंगे।

ममता ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी ने चुनाव से कई महीने पहले ही मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया कि बंगाल में शुरुआत में 58 लाख मतदाता प्रभावित हुए, इसके बाद 27 लाख नाम हटाए गए और अन्य बदलावों का भी आरोप लगाया। हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर चुनाव आयोग का कहना है कि SIR प्रक्रिया में मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और डुप्लीकेट मतदाताओं समेत विभिन्न श्रेणियों के नामों की जांच की गई थी। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि 27.16 लाख हटाए गए मतदाताओं में से 22 लाख से अधिक ने नाम बहाल कराने के लिए अपील की है।

ममता बनर्जी ने बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और पुराने वोटर लिस्ट के आधार पर दोबारा चुनाव कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में SIR के बाद चुनाव हुए और जहां उनके मुताबिक मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए, वहां भी पुराने वोटर लिस्ट के आधार पर चुनाव कराए जाने चाहिए।

उन्होंने चुनाव आयोग के अलावा उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की, जिनके बारे में उनका आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर इन प्रक्रियाओं में भूमिका निभाई। इनमें डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर, IT अधिकारी और ERO समेत अन्य अधिकारियों के नाम लिए गए।

ममता ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को किसी एक राजनीतिक दल के हितों के लिए नहीं, बल्कि देश, लोकतंत्र और संविधान के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से भी राजनीतिक निष्पक्षता बनाए रखने की अपील की।

यह पूरा विवाद ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची प्रबंधन और SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के बाद कांग्रेस, TMC, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने CEC के खिलाफ अलग-अलग मांगें रखी हैं। वहीं चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *