KNEWS DESK- भारतीय रेलवे की वंदे भारत और शताब्दी एक्सप्रेस दोनों ही दिन के सफर के लिए लोकप्रिय ट्रेनें हैं। दोनों में एसी चेयर कार और एग्जीक्यूटिव चेयर कार जैसी सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन रफ्तार, डिजाइन, तकनीक और कुछ सुविधाओं में दोनों के बीच अंतर है। जानिए किस तरह अलग हैं वंदे भारत और शताब्दी।
भारत में दिन के समय यात्रा करने वाले यात्रियों के बीच शताब्दी एक्सप्रेस लंबे समय से लोकप्रिय रही है। खासकर बड़े शहरों को तेज सफर के जरिए जोड़ने वाली शताब्दी ट्रेनों को यात्रियों की पसंदीदा सेवाओं में गिना जाता है। वहीं, वंदे भारत एक्सप्रेस के आने के बाद रेलवे की दिन की यात्रा का अनुभव नए डिजाइन, आधुनिक सुविधाओं और कुछ रूटों पर ज्यादा रफ्तार के साथ बदला है। दोनों ट्रेनें पूरी तरह एसी हैं और इनमें चेयर कार (CC) तथा एग्जीक्यूटिव चेयर कार (EC) के विकल्प मिलते हैं। यात्रा की अवधि और सेवा के अनुसार दोनों ट्रेनों में यात्रियों को भोजन भी परोसा जाता है। हालांकि, दोनों के बीच कई महत्वपूर्ण अंतर हैं।
वंदे भारत ट्रेनें उन रूटों पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चल सकती हैं, जहां रेलवे का बुनियादी ढांचा इसकी अनुमति देता है। फिलहाल तुगलकाबाद-आगरा खंड पर यह अधिकतम गति हासिल की जाती है। वंदे भारत को तेजी से रफ्तार पकड़ने के हिसाब से भी डिजाइन किया गया है। दूसरी ओर, शताब्दी ट्रेनें आमतौर पर कम गति पर चलती हैं और संबंधित रूटों पर इनकी अधिकतम गति 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक होती है। हालांकि, केवल अधिकतम गति के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि वंदे भारत किसी यात्रा में हमेशा जल्दी पहुंचाएगी। वास्तविक यात्रा का समय रूट, स्टॉप की संख्या, ट्रैक की स्थिति और ट्रैफिक पर निर्भर करता है।
वंदे भारत और नियमित शताब्दी सेवाएं रातभर की यात्रा के बजाय दिन में बैठकर सफर करने के लिए डिजाइन की गई हैं। वंदे भारत को मध्यम और लंबी दूरी की यात्राओं के लिए शुरू किया गया था। आमतौर पर ये ऐसे शहरों को जोड़ती हैं, जो करीब 800 किलोमीटर से कम दूरी पर हैं या मौजूदा सेवाओं के साथ 10 घंटे से कम समय में पहुंच सकते हैं। वहीं, शताब्दी ट्रेनों के रूट अलग-अलग लंबाई के होते हैं और इनमें एक ही दिन में वापसी के शेड्यूल वाली सेवाएं भी शामिल हैं।
सुविधाओं की बात करें तो दोनों ट्रेनों में एसी चेयर कार और एग्जीक्यूटिव चेयर कार उपलब्ध हैं। चेयर कार में स्टैंडर्ड सीटिंग मिलती है, जबकि एग्जीक्यूटिव चेयर कार में ज्यादा आरामदायक सीटिंग की सुविधा होती है। वंदे भारत के आधुनिक इंटीरियर में रिक्लाइनिंग सीटें, चार्जिंग पॉइंट और व्यक्तिगत रीडिंग लाइट जैसी सुविधाएं शामिल हैं। एग्जीक्यूटिव क्लास की सीटें कोच के कॉन्फिगरेशन के आधार पर घूमने वाली भी हो सकती हैं।
शताब्दी ट्रेनों में भी चेयर कार और एग्जीक्यूटिव चेयर कार की सुविधा मिलती है। कुछ चुनिंदा शताब्दी सेवाओं में विस्टाडोम कोच भी उपलब्ध हैं। इनमें बड़ी खिड़कियां, कांच की छत और घूमने वाली सीटें होती हैं। यह सुविधा केवल कुछ खास रूटों पर ही मिलती है।
वंदे भारत में स्वचालित यात्री दरवाजे, यात्री सूचना डिस्प्ले, जीपीएस आधारित सूचना सिस्टम, सीसीटीवी, बायो-वैक्यूम टॉयलेट और ऑनबोर्ड इन्फोटेनमेंट जैसी आधुनिक सुविधाएं भी दी गई हैं।
दोनों ट्रेनों की तकनीक में भी बड़ा अंतर है। वंदे भारत एक सेल्फ-प्रोपेल्ड इलेक्ट्रिक ट्रेनसेट है। इसमें पावर पूरे ट्रेनसेट में वितरित होती है और सभी कोचों को खींचने के लिए अलग लोकोमोटिव की जरूरत नहीं होती। वंदे भारत ट्रेनसेट आठ, 16 या 20 कोचों के निश्चित फॉर्मेशन में तैयार किए जाते हैं।
इसके विपरीत, शताब्दी एक लोकोमोटिव से खींची जाने वाली ट्रेन है। इसमें एक लोकोमोटिव यात्री कोचों को खींचता है। शताब्दी पारंपरिक रेक का इस्तेमाल करती है और इसकी कोच संरचना संबंधित सेवा पर निर्भर करती है।
इसलिए केवल ट्रेन के नाम के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी खास यात्रा के लिए कौन सी ट्रेन उपयुक्त होगी। यात्रियों को अपनी यात्रा की तारीख और रूट के अनुसार ट्रेन का कुल समय, प्रस्थान और आगमन का समय, CC और EC का किराया, सीट की उपलब्धता और खानपान की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।