KNEWS DESK-रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और आपसी स्नेह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ धार्मिक परंपराओं के अनुसार भाई को राखी बांधने से पहले सबसे पहले भगवान गणेश को रक्षा सूत्र अर्पित किया जाता है?
भगवान गणेश को हिंदू धर्म में प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से करने की परंपरा है। इसी मान्यता के चलते कई परिवारों में रक्षाबंधन की पूजा शुरू करने से पहले गणेश जी को राखी अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है।
सबसे पहले गणेश जी को राखी क्यों बांधते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने वाले देवता हैं। रक्षाबंधन के दिन उन्हें रक्षा सूत्र अर्पित करने का उद्देश्य पर्व की शुरुआत शुभ तरीके से करना माना जाता है। इस दौरान भक्त गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा करते हैं। इसके बाद रोली, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करके रक्षा सूत्र बांधा जाता है। मान्यता है कि इससे गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
गणेश पूजन के बाद भाई को बांधें राखी
भगवान गणेश को राखी अर्पित करने और उनकी पूजा करने के बाद भाई को राखी बांधने की परंपरा निभाई जा सकती है। सबसे पहले भाई को आसन पर बैठाकर उसके माथे पर तिलक लगाया जाता है। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती की जाती है और उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा जाता है। राखी बांधने के बाद भाई को मिठाई खिलाई जाती है। भाई अपनी बहन को उपहार देता है और उसकी खुशहाली तथा सुरक्षा की कामना करता है। इस तरह रक्षाबंधन का पर्व पूजा, प्रेम और पारिवारिक भावनाओं के साथ पूरा होता है।
रक्षाबंधन पर गणेश पूजा का क्या महत्व है?
भगवान गणेश को बुद्धि, शुभता और मंगल के देवता के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में किसी भी मांगलिक कार्य से पहले गणेश जी का स्मरण करने की परंपरा है। इसलिए कई परिवार रक्षाबंधन की शुरुआत भी गणेश पूजन से करते हैं। मान्यता है कि विघ्नहर्ता का आशीर्वाद लेकर शुरू किया गया शुभ कार्य मंगलकारी होता है। इसी वजह से रक्षाबंधन पर गणेश जी को रक्षा सूत्र अर्पित करने की परंपरा को भी विशेष महत्व दिया जाता है।
रक्षाबंधन 2026 पर कब बांधें राखी?
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। दी गई जानकारी के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे से शुरू होकर 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे तक रहेगी। राखी बांधने के लिए 28 अगस्त को सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। हालांकि, अलग-अलग स्थानों के पंचांग के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग को भी देखना उचित रहेगा।
क्या गणेश जी को राखी बांधना जरूरी है?
भगवान गणेश को राखी बांधना धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा माना जाता है। यह हर परिवार के लिए अनिवार्य नियम नहीं है। कई परिवार रक्षाबंधन की शुरुआत गणेश पूजन से करते हैं, जबकि कुछ परिवार सीधे भाई को राखी बांधने की परंपरा निभाते हैं।
इसलिए रक्षाबंधन पर सबसे महत्वपूर्ण बात भाई-बहन के बीच प्रेम, सम्मान और शुभकामनाओं की भावना है। परिवार की परंपरा और आस्था के अनुसार इस पर्व को श्रद्धा के साथ मनाया जा सकता है।