Knews Desk: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन सीट बंटवारे और मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर दोनों दलों के बीच सहमति बनती नजर नहीं आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी 55 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है, जबकि अकाली दल करीब 45 सीटें देने के पक्ष में है।
117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा में सीटों को लेकर दोनों पार्टियों के बीच महज 10 सीटों का अंतर रह गया है। इससे पहले जब दोनों दल गठबंधन में थे, तब अकाली दल 94 और बीजेपी 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी। ऐसे में बीजेपी अब गठबंधन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर ‘बड़े भाई’ की भूमिका चाहती है।
CM चेहरे को लेकर भी मतभेद
सिर्फ सीटों का बंटवारा ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर भी दोनों पार्टियों की रणनीति अलग-अलग है। अकाली दल चाहता है कि चुनाव से पहले सुखबीर सिंह बादल को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जाए। वहीं बीजेपी चुनाव से पहले किसी चेहरे का ऐलान करने के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने के पक्ष में है।
बीजेपी का मानना है कि मुख्यमंत्री का फैसला चुनाव परिणाम आने के बाद किया जाना चाहिए। यही मुद्दा गठबंधन की बातचीत में बड़ी अड़चन बन सकता है।
समझौता नहीं हुआ तो अकेले चुनाव लड़ सकती है BJP
बीजेपी ने संगठन स्तर पर यह संकेत दिया है कि अगर अकाली दल के साथ सीटों और अन्य मुद्दों पर सम्मानजनक समझौता नहीं बनता है तो पार्टी पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के विकल्प पर भी आगे बढ़ सकती है।
पार्टी लोकसभा चुनाव 2024 के प्रदर्शन को आधार बनाकर पंजाब में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। बीजेपी भले ही लोकसभा चुनाव में कोई सीट नहीं जीत सकी, लेकिन अमृतसर और जालंधर जैसे बड़े शहरों के करीब 10 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी दूसरे स्थान पर रही थी। वहीं अकाली दल सात विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे नंबर पर रहा था।
चार दलों के बीच हो सकता है मुकाबला
अगर BJP और SAD के बीच गठबंधन नहीं हो पाता है तो पंजाब में इस बार मुकाबला चार प्रमुख दलों के बीच देखने को मिल सकता है। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी अलग-अलग चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए 92 सीटें हासिल की थीं। मौजूदा विधानसभा में कांग्रेस के पास 15, अकाली दल के पास 3 और बीजेपी के पास 2 सीटें हैं, जबकि अन्य और निर्दलीय विधायकों के पास 5 सीटें हैं।
ऐसे में आने वाले दिनों में BJP और अकाली दल के बीच सीटों तथा मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर होने वाली बातचीत पंजाब की चुनावी तस्वीर को काफी हद तक तय कर सकती है।