Knews Desk: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खुदरा बाजार में मंगलवार को चीनी की कीमत करीब एक रुपये बढ़कर औसतन 63.97 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। कुछ इलाकों में चीनी 76 रुपये प्रति किलो तक के भाव पर भी बिकती देखी गई। सोमवार को इसका औसत खुदरा भाव 63.05 रुपये प्रति किलो था।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी प्रभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 25 अगस्त को चीनी का औसत खुदरा भाव 63.97 रुपये प्रति किलो रहा। यह एक महीने पहले यानी 25 जुलाई के 48.81 रुपये प्रति किलो के मुकाबले करीब 31 फीसदी ज्यादा है। वहीं, एक साल पहले इसी अवधि में चीनी का औसत भाव 46.31 रुपये प्रति किलो था। यानी सालाना आधार पर भी चीनी की कीमत में बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है। हालांकि, चीनी के मिल भाव में पिछले कुछ दिनों से गिरावट देखने को मिली है, लेकिन इसका फायदा फिलहाल खुदरा ग्राहकों तक नहीं पहुंचा है। सरकार के मुताबिक, मिल स्तर पर कीमतें कम होने का असर आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है।
थोक बाजार में भी बढ़ी कीमत
थोक बाजार की बात करें तो सोमवार को चीनी का भाव 59.23 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। एक महीने पहले थोक बाजार में चीनी 45.35 रुपये प्रति किलो थी, जबकि एक साल पहले इसका भाव 43.01 रुपये प्रति किलो था। इस तरह थोक बाजार में भी कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा था कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार ने घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए चीनी आयात की अनुमति देने के साथ-साथ सट्टेबाजी और जमाखोरी पर रोक लगाने के कदम उठाए हैं।
सरकार के इन उपायों के बाद चीनी का मिल भाव करीब 18 फीसदी घटकर 55 रुपये प्रति किलो पर आ गया है। इससे पहले पिछले सप्ताह मिल स्तर पर चीनी की कीमत रिकॉर्ड 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। सरकार को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मिल भाव में और गिरावट आएगी और इसका असर खुदरा कीमतों पर भी पड़ेगा।
चीनी उत्पादन और स्टॉक की स्थिति
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुमान के मुताबिक, 2025-26 मार्केटिंग वर्ष यानी अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 के दौरान एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी को अलग करने के बाद देश में करीब 279 लाख टन चीनी उत्पादन होने का अनुमान है। वहीं, मार्केटिंग वर्ष की शुरुआत में करीब 50 लाख टन का शुरुआती स्टॉक मौजूद था। देश में चीनी की सालाना घरेलू मांग लगभग 280 से 285 लाख टन रहने का अनुमान है।
अनुमान है कि सितंबर के अंत तक देश में करीब 35 लाख टन चीनी का स्टॉक बच सकता है। मौजूदा मार्केटिंग वर्ष में कुल चीनी उत्पादन करीब 309 लाख टन रहने का अनुमान है। सरकार और उद्योग संगठन दोनों का कहना है कि देश में फिलहाल पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। हालांकि, खुदरा और थोक बाजार में कीमतों में अंतर और सप्लाई को लेकर दबाव के कारण आम उपभोक्ताओं को महंगी चीनी खरीदनी पड़ रही है। आने वाले दिनों में मिल भाव में गिरावट का असर खुदरा बाजार तक पहुंचता है या नहीं, इस पर सबकी नजर रहेगी।