सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, राष्ट्रीय राजमार्गों के राइट ऑफ वे में नए ढाबे और व्यावसायिक निर्माण पर रोक
Knews Desk- महाराष्ट्र में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे ढाबा, भोजनालय या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान खोलने की योजना बना रहे लोगों को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने नेशनल हाईवे के राइट ऑफ वे (ROW) के भीतर नए ढाबों और अन्य व्यावसायिक ढांचों के निर्माण और संचालन पर रोक लगा दी है।
सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि हाईवे के राइट ऑफ वे में मौजूद अनधिकृत ढांचों की पहचान कर उन्हें हटाने या ध्वस्त करने की कार्रवाई 60 दिनों के भीतर पूरी की जाए। इस कार्रवाई में जिला प्रशासन के साथ पुलिस और संबंधित हाईवे एजेंसियां भी शामिल रहेंगी।
महाराष्ट्र सरकार के सरकारी संकल्प के मुताबिक, राष्ट्रीय राजमार्ग के सुरक्षा क्षेत्र में आने वाली जमीन के लिए एनएचएआई या लोक निर्माण विभाग की पूर्व मंजूरी के बिना कोई विभाग, प्राधिकरण या स्थानीय निकाय लाइसेंस, एनओसी या व्यापारिक अनुमति जारी नहीं कर सकेगा। पहले से जारी किए गए लाइसेंस और अनुमतियों की भी 30 दिनों के भीतर समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
किन हाईवे पर सबसे ज्यादा ढाबे हैं?
महाराष्ट्र के कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर बड़ी संख्या में ट्रक स्टॉप और पारिवारिक ढाबे संचालित होते हैं। इनमें मुंबई-नासिक, मुंबई-अहमदाबाद और पुराने मुंबई-पुणे मार्ग प्रमुख हैं।
अब प्रशासन इन प्रतिष्ठानों की जांच करेगा कि वे हाईवे के राइट ऑफ वे के भीतर आते हैं या नहीं। इसके साथ ही उनकी जमीन, जरूरी मंजूरियों, हाईवे सुरक्षा मानकों और अन्य कानूनी अनुमतियों की भी जांच की जाएगी। यानी हर ढाबे के खिलाफ कार्रवाई उसकी वास्तविक स्थिति और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर होगी।
कलेक्टर और पुलिस की होगी संयुक्त जिम्मेदारी
सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि हाईवे के राइट ऑफ वे में मौजूद अतिक्रमण को हटाने की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर और पुलिस आयुक्त या पुलिस अधीक्षक की संयुक्त होगी। प्रशासन को इस पूरी प्रक्रिया को तय समय सीमा के भीतर पूरा करना होगा।
महाराष्ट्र सरकार अगले 60 दिनों में ऐसे नोटिफिकेशन जारी करेगी, जिसके तहत राष्ट्रीय राजमार्ग के मध्य बिंदु से 40 मीटर के दायरे में आवासीय और 75 मीटर के दायरे में व्यावसायिक भूमि उपयोग में बदलाव पर रोक लगाई जाएगी।
इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग वाले प्रत्येक जिले में सात दिनों के भीतर जिला हाईवे सुरक्षा टास्क फोर्स गठित करने का निर्देश दिया गया है। इस टीम में जिला प्रशासन, पुलिस, एनएचएआई या संबंधित भूमि स्वामित्व वाली एजेंसी, लोक निर्माण विभाग और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल होंगे।
क्यों लिया गया यह फैसला?
दरअसल, राजस्थान के फलोदी में वर्ष 2025 में हुए एक सड़क हादसे के मामले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों के राइट ऑफ वे और सुरक्षा क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण को लेकर सख्त रुख अपनाया था। इसी के बाद महाराष्ट्र सरकार ने हाईवे के सुरक्षा क्षेत्र में नए ढाबों और व्यावसायिक ढांचों पर रोक लगाने का फैसला किया है।
सरकार का उद्देश्य हाईवे पर अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण को नियंत्रित करना, यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाना और सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करना है।