KNEWS DESK- देश के कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। उत्तराखंड में नदियां उफान पर हैं, भूस्खलन के कारण 109 सड़कें बंद हो गई हैं और चारधाम यात्रा एक बार फिर रोकनी पड़ी है। वहीं असम में बाढ़ से हालात गंभीर बने हुए हैं। अब तक 78 लोगों की मौत हो चुकी है और तीन लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। मौसम विभाग ने अगले तीन से चार दिनों तक कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
असम में बाढ़ की स्थिति को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सात दिनों में दूसरी बार मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से फोन पर बातचीत कर हालात की समीक्षा की। उन्होंने राज्य को केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि 21 जुलाई के बाद से भारी बारिश नहीं हुई है, जिससे कई इलाकों में बाढ़ का पानी उतरने लगा है। हालांकि भारी तबाही के कारण लोग अभी भी अपने घरों में नहीं लौट पाए हैं।
सरमा के मुताबिक कई मकान मलबे और कीचड़ में दब गए हैं, जबकि नागालैंड की पहाड़ियों से आए मलबे के कारण कई सड़कें बंद हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल किसी अंतरराष्ट्रीय सहायता की जरूरत नहीं है क्योंकि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर राहत एवं पुनर्वास कार्य चला रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के निर्देश पर बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए बैंकों के साथ बैठक की जाएगी, जिसमें ऋण संबंधी राहत उपायों पर चर्चा होगी। इस बीच केंद्र की एक टीम ने शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों का दौरा कर नुकसान का आकलन किया है।
वहीं उत्तराखंड में लगातार बारिश से हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। हरिद्वार में गंगा नदी खतरे के निशान से महज 1.10 मीटर नीचे बह रही है। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां चेतावनी स्तर से ऊपर पहुंच चुकी हैं, जबकि पिथौरागढ़ में काली नदी भी खतरे के निशान के करीब बह रही है। भूस्खलन के कारण टिहरी-मसूरी मालेथा हाईवे बंद है और यमुनोत्री पैदल मार्ग का एक हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया है। प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की है।
मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की है। अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना को देखते हुए राहत और बचाव एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है।