केस हटाने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, रजिस्ट्री से पूछा- बेंच को क्यों नहीं दी जानकारी?

CAPF से जुड़े मामले की लिस्टिंग में बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री से जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल उठाया कि मूल बेंच को जानकारी दिए बिना केस को दूसरी बेंच के सामने कैसे भेज दिया गया।

Knews Desk- सुप्रीम कोर्ट ने CAPF से जुड़े एक मामले की लिस्टिंग में अचानक किए गए बदलाव पर नाराजगी जताई है। बुधवार को जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की स्पेशल बेंच के सामने इस मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस बात पर सवाल उठाया कि जिस बेंच के सामने मामला पहले से सूचीबद्ध था, उसे केस हटाए जाने की जानकारी क्यों नहीं दी गई।

दरअसल, यह मामला पहले जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस अतुल चन्दुरकर की बेंच के सामने सूचीबद्ध था। सुनवाई शुरू होने से ठीक पहले केस को लिस्ट से हटा दिया गया। इसके बाद मामले को स्पेशल बेंच के सामने भेजे जाने की जानकारी सामने आई। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जारी नोटिस में भी बताया गया कि केस को स्पेशल बेंच में ट्रांसफर किया गया है।

कोर्ट ने रजिस्ट्री के इस तरीके पर सवाल उठाते हुए सफाई मांगी। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि सरकारी वकील ने दूसरी पार्टी को बताए बिना सीधे भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के सामने मामले को स्पेशल बेंच में भेजने की मांग रखी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि मामले को स्पेशल बेंच के सामने भेजने से पहले मूल बेंच को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता से जुड़े सवाल भी उठाए।

यह स्पेशल बेंच उस कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई कर रही है, जिसका असर अवमानना ​​मामलों पर पड़ सकता है। इसी वजह से CAPF से जुड़े मामले को भी इसी बेंच के सामने सूचीबद्ध किया गया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रजिस्ट्री की ओर से दी गई सफाई पर गौर किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना ​​मामले की सुनवाई के लिए 15 अक्टूबर की तारीख तय की है। इसी दिन संबंधित कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर भी सुनवाई होगी।

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