Knews Desk– केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 1.86 लाख करोड़ रुपये की PM-DHARA योजना को मंजूरी दी। योजना का उद्देश्य 135 GW तक नवीकरणीय ऊर्जा के ट्रांसमिशन के लिए राज्य के भीतर ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत करना और 50 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित करना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने PM-DHARA योजना को मंजूरी दी है। PM-DHARA का पूरा नाम ‘PM-Developing Harmonized and Accelerated Renewable-energy Access’ है। यह योजना भारत के 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
योजना के तहत भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 GW तक नवीकरणीय ऊर्जा को ट्रांसमिट करने के लिए इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर या ग्रिड की जरूरत के अनुसार 50 GWh के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम लगाए जाएंगे।
BESS से नवीकरणीय ऊर्जा की रुक-रुक कर होने वाली सप्लाई, ग्रिड कंजेशन, पीक आवर की मांग और नॉन-सोलर घंटों में बिजली की जरूरत जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। इससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर ग्रिड इंटीग्रेशन और बिजली ट्रांसमिशन की प्रक्रिया आसान होगी।
इस योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कुल 1,86,405 करोड़ रुपये की प्रोजेक्ट लागत तय की गई है। इसमें इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के विकास के लिए 1,36,378 करोड़ रुपये और 50 GWh BESS के लिए 50,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।
योजना के तहत केंद्र सरकार 54,082 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता देगी। सरकार के मुताबिक, इससे इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन शुल्क कम करने में मदद मिलेगी और बिजली की लागत को नियंत्रित रखने में सहायता मिलेगी।
राज्य ट्रांसमिशन यूटिलिटीज योजना की प्रमुख कार्यान्वयन एजेंसियां होंगी। ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स को टैरिफ-बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग के जरिए लागू किया जाएगा, जबकि ब्राउनफील्ड अपग्रेडेशन और नेटवर्क मजबूत करने के काम कॉस्ट-प्लस बेसिस पर किए जाएंगे।
सरकार के अनुसार, योजना से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और कार्बन फुटप्रिंट कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही पावर सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। BESS की मैन्युफैक्चरिंग और स्थापना से घरेलू एनर्जी स्टोरेज इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।