उन्नाव में बिजली विभाग और विजिलेंस टीम पर उगाही के आरोप, क्यूआर कोड भेजकर वसूली का दावा

KNEWS DESK – उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से बिजली विभाग और विजिलेंस टीम से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बिजली चोरी की जांच के नाम पर छापेमारी के बाद उपभोक्ताओं को फोन कर धमकाया गया और कई लोगों से कथित तौर पर रिश्वत की रकम वसूली गई। ग्रामीणों का दावा है कि रकम लेने के लिए बाकायदा क्यूआर कोड भेजे गए और पैसे विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कराए गए।

ग्रामीणों के अनुसार, बिहार गांव और आसपास के इलाकों में बिजली आपूर्ति की खराब स्थिति को लेकर लोगों ने आवाज उठाई थी। इसके बाद विजिलेंस और बिजली विभाग की टीम ने क्षेत्र में छापेमारी अभियान चलाया। गांव वालों का आरोप है कि जांच के दौरान कई घरों में कोई बिजली चोरी या अनियमितता नहीं मिली, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोगों को फोन कर कार्रवाई की धमकी दी गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल कर उपभोक्ताओं से 15 हजार रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक की रकम मांगी गई। आरोप है कि रकम न देने पर झूठे मुकदमे में फंसाने और बिजली चोरी के केस दर्ज कराने की धमकी दी गई। कई ग्रामीणों ने दावा किया है कि उनके पास मोबाइल कॉल रिकॉर्डिंग और ऑनलाइन भुगतान के प्रमाण मौजूद हैं।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि कथित रूप से भेजे गए क्यूआर कोड के माध्यम से रकम निजी खातों में जमा कराई गई। उनका कहना है कि यदि इन खातों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पूरे मामले का खुलासा हो सकता है और एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हो सकता है।

क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि एक ओर वे लंबे समय से बिजली संकट झेल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन पर कथित दबाव बनाकर वसूली की जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, हाल ही में आई आंधी और खराब मौसम के कारण क्षेत्र में लगभग 20 दिनों तक बिजली आपूर्ति प्रभावित रही, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मामले को लेकर ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों, ऊर्जा विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंचाने का दावा किया है। अब ग्रामीण पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

हालांकि, इस संबंध में बिजली विभाग या विजिलेंस टीम की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला विभागीय कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

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