सुप्रीम कोर्ट ने रोका हाई कोर्ट का आदेश, कम अटेंडेंस वाले लॉ छात्रों पर बड़ा फैसला

Knews Desk– सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस अहम आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि केवल कम अटेंडेंस के आधार पर कानून के छात्रों को परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जा सकता। इस मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले के प्रभाव पर फिलहाल रोक लगा दी और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि मामले की विस्तृत सुनवाई जरूरी है। अदालत ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई तक दिल्ली हाई कोर्ट के विवादित आदेश के पैरा 249 के संचालन पर रोक लगा दी है। यह मामला कानूनी शिक्षा में अनिवार्य उपस्थिति के नियमों को लेकर देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले साल एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा था कि केवल कम अटेंडेंस के आधार पर किसी भी लॉ स्टूडेंट को परीक्षा देने से नहीं रोका जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने यह भी माना था कि कानूनी शिक्षा सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं है, बल्कि मूट कोर्ट, डिबेट, सेमिनार और दूसरी अकादमिक गतिविधियां भी पढ़ाई का अहम हिस्सा हैं।

हाई कोर्ट का यह आदेश 2016 में एमिटी यूनिवर्सिटी के एक छात्र की आत्महत्या से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आया था। आरोप था कि कम अटेंडेंस के कारण छात्र को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिली थी, जिससे वह मानसिक तनाव में था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को दिल्ली हाई कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया था।

अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद लॉ छात्रों, विश्वविद्यालयों और शिक्षा संस्थानों के बीच बहस फिर तेज हो गई है। कई छात्र संगठनों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में लचीलापन जरूरी है, जबकि BCI का तर्क है कि कानूनी शिक्षा में नियमित उपस्थिति बेहद अहम है।

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