KNews Desk: अमेरिका के रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन में नेतृत्व को लेकर संकट गहराता जा रहा है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के कार्यकाल में 25 से ज्यादा वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को पद से हटाया गया है, जबकि करीब 45 अधिकारियों के प्रमोशन पर रोक लगाई गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब ईरान के साथ युद्ध को छह महीने हो चुके हैं और अमेरिकी सेना पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के हटने और प्रमोशन रुकने से पेंटागन के भीतर असंतोष और नेतृत्व को लेकर सवाल बढ़ रहे हैं।
पेंटागन में संकट को उस समय बड़ा झटका लगा, जब सोमवार को आर्मी सेक्रेटरी डैन ड्रिस्कॉल ने इस्तीफा दे दिया। ड्रिस्कॉल उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के दोस्त और येल लॉ के बैचमेट हैं। उन्हें कभी पीट हेगसेथ के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर भी देखा जाता था। हालांकि, सेना के नेतृत्व और आधुनिकीकरण को लेकर दोनों के बीच लंबे समय से मतभेद बताए जाते रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ड्रिस्कॉल को यूक्रेन से जुड़ी संवेदनशील कूटनीति की जिम्मेदारी भी दी थी। उनके इस्तीफे के बाद अमेरिकी सेना में नेतृत्व का संकट और गहरा गया है। इससे पहले हेगसेथ ने आर्मी चीफ जनरल रैंडी जॉर्ज को भी पद से हटा दिया था।
हेगसेथ के कार्यकाल में लगभग हर मिलिट्री सर्विस के शीर्ष अधिकारियों में बदलाव देखने को मिला है। इनमें ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन, नौसेना के शीर्ष एडमिरल और आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो दर्जन से ज्यादा वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया गया है या उन्होंने अपने पद छोड़ दिए हैं। ज्वाइंट चीफ्स में केवल मरीन कॉर्प्स और स्पेस फोर्स के वे प्रमुख बचे हैं, जो हेगसेथ के कार्यकाल की शुरुआत में इन पदों पर थे।इसके अलावा हेगसेथ ने इस साल कम से कम 45 अधिकारियों के प्रमोशन पर रोक लगाई है। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के प्रमोशन की प्रक्रिया आमतौर पर राजनीतिक हस्तक्षेप से काफी हद तक अलग रहती है। ऐसे में प्रमोशन रोकने के फैसले ने भी विवाद को जन्म दिया है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हाल के हफ्तों में एक दर्जन से ज्यादा अश्वेत, हिस्पैनिक और महिला अधिकारियों के प्रमोशन भी रोके गए हैं।
यह पूरा विवाद ईरान युद्ध के बीच सामने आया है, जिससे अमेरिकी सेना की क्षमता और तैयारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। यूरोप, प्रशांत और लैटिन अमेरिका में तैनात अमेरिकी सैन्य कमांडरों ने ईरान युद्ध के लिए सैनिकों की तैनाती बढ़ाने को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि लंबे समय तक सैनिकों को एक क्षेत्र में तैनात रखने से दूसरे इलाकों में संभावित खतरों से निपटने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।युद्ध का असर अमेरिकी हथियारों के भंडार पर भी पड़ने की खबरें हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना के करीब 25 प्रतिशत डिस्ट्रॉयर ही तैनाती के लिए तैयार हैं और प्रशांत क्षेत्र में तैनात अमेरिका का एकमात्र समर्पित एयरक्राफ्ट कैरियर भी मध्य पूर्व भेज दिया गया है। वहीं, अमेरिका के 65 प्रतिशत पैट्रियट इंटरसेप्टर इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया है। इससे NATO सहयोगियों को हथियार उपलब्ध कराने और चीन के साथ संभावित संघर्ष की तैयारियों को लेकर भी दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, पेंटागन ने इन दावों को खारिज किया है। प्रवक्ता सीन पार्नेल ने मंत्रालय में अव्यवस्था की खबरों को गलत बताया और कहा कि जनरलों के बीच असहमति सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने गोपनीय सैन्य आकलनों को सार्वजनिक किए जाने को गंभीर अपराध बताया। हथियारों की कमी से जुड़े दावों पर भी पेंटागन ने कहा कि अमेरिका के पास पर्याप्त हथियारों का भंडार मौजूद है।पेंटागन की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। 5 मई के बाद से कोई औपचारिक प्रेस ब्रीफिंग नहीं हुई है। इसके बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार हेगसेथ का समर्थन कर रहे हैं और कांग्रेस से रिकॉर्ड 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट को मंजूरी देने की अपील कर चुके हैं। ऐसे में ईरान युद्ध के बीच पेंटागन में जारी नेतृत्व संकट आने वाले समय में अमेरिकी रक्षा नीति के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है।