Knews Desk– सोनम वांगचुक ने लेह में पिछले साल हुई हिंसा की तुलना चीन के तिब्बत में दमन से की। उनके बयान पर केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने इसे गलत और अनुचित तुलना बताया है लद्दाख में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का लेह हिंसा और तिब्बत को लेकर दिया गया बयान विवादों में आ गया है। वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि कुछ लोग उनसे पूछ रहे हैं कि पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा की तुलना तिब्बत में चीन के दमन से करना उचित है या नहीं। उन्होंने कहा कि कई हफ्तों तक इंटरनेट बंद रहने के कारण बहुत से लोग उस दिन लेह में हुई घटनाओं से पूरी तरह परिचित नहीं हैं।
वांगचुक ने कहा कि वह तिब्बती लोगों के दुख को समझते हैं और चीन के दमन का हमेशा विरोध करते रहे हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में दावा किया कि लेह की करीब 20 हजार आबादी वाले शहर में चार लोगों की मौत हुई, एक व्यक्ति ने आत्महत्या की, 80 लोग घायल हुए और 75 लोगों को हत्या के प्रयास जैसे आरोपों में गिरफ्तार किया गया। हालांकि, पिछले साल की हिंसा में चार लोगों की मौत और 80 से अधिक लोगों के घायल होने की रिपोर्ट उपलब्ध है।
वांगचुक ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का भी जिक्र किया और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ पुलिस कार्रवाई पर भी चर्चा होनी चाहिए।
इससे पहले 24 सितंबर को लेह में पिछले साल हुई हिंसा की पहली बरसी पर वांगचुक ने कहा था कि लद्दाख ने भारत को लोकतंत्र और सम्मानजनक जीवन की उम्मीद के कारण चुना था। उन्होंने पिछले साल की घटना की न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी की है।
वहीं, केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने वांगचुक की तुलना को ‘गलत और अनुचित’ बताया। प्रशासन का कहना है कि तिब्बत में चीन के शासन के तहत दमन की स्थिति को लद्दाख की घटना से जोड़ना उचित नहीं है। इसके बाद वांगचुक ने कहा कि उनका उद्देश्य तिब्बती मित्रों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था और यदि उनकी बात से किसी को दुख हुआ है तो वह माफी मांगते हैं।