KNEWS DESK- पश्चिम बंगाल की राजनीति में कभी तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली दक्षिण 24 परगना जिले की फलता विधानसभा सीट अब पूरी तरह बदलते राजनीतिक समीकरणों का केंद्र बन गई है। 2026 विधानसभा चुनाव में टीएमसी सरकार के पतन के महज 15 दिनों के भीतर ही फलता में पार्टी की पकड़ कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। स्थिति इतनी बदल चुकी है कि चुनाव से पहले दमदार दावेदारी पेश करने वाले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने खुद ही चुनाव मैदान छोड़ दिया।
गुरुवार को फलता विधानसभा सीट पर पुनर्मतदान हो रहा है। इस बार मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा और कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुर रज्जाक मोल्ला के बीच माना जा रहा है। इसके अलावा माकपा के शंभुनाथ कुर्मी, निर्दलीय उम्मीदवार दीप हाटी और चंद्रकांत राय भी चुनावी मैदान में हैं।
चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल को मतदान के दौरान कथित धांधली और हिंसा की शिकायतों के बाद फलता सीट का चुनाव रद्द कर पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया था। गुरुवार सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक मतदान होगा, जबकि मतगणना 24 मई को की जाएगी।राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के अचानक चुनाव से हटने को लेकर है। मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने चुनाव न लड़ने की घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा फलता के लिए घोषित विशेष पैकेज के जरिए क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकता है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक इसे टीएमसी की अंदरूनी कमजोरी और बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत मान रहे हैं।
जहांगीर खान को तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी का करीबी समर्थक माना जाता रहा है। ऐसे में उनका मैदान छोड़ना अभिषेक बनर्जी के लिए भी एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि डायमंड हार्बर मॉडल को लेकर पिछले कुछ वर्षों में टीएमसी लगातार राजनीतिक बढ़त का दावा करती रही थी।
अभिषेक बनर्जी ने 2024 लोकसभा चुनाव में डायमंड हार्बर सीट से रिकॉर्ड 7 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। वहीं 2021 विधानसभा चुनाव में इसी क्षेत्र में उनकी बढ़त करीब 40 हजार वोटों की थी, जो 2024 तक बढ़कर 1 लाख 68 हजार से ज्यादा हो गई थी। लेकिन अब उसी इलाके में टीएमसी के उम्मीदवार का चुनाव छोड़ देना पार्टी के कमजोर होते संगठनात्मक ढांचे की ओर इशारा कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, जहांगीर खान ने चुनाव से हटने से पहले अभिषेक बनर्जी से संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने स्वतंत्र रूप से चुनाव से हटने का फैसला लिया। बताया जा रहा है कि पिछले एक सप्ताह से फलता में टीएमसी नेतृत्व की सक्रियता लगभग नदारद थी, जबकि भाजपा पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में डटी हुई थी।
फलता उपचुनाव अब केवल एक विधानसभा सीट का मुकाबला नहीं रह गया है, बल्कि यह बंगाल की बदलती राजनीति और टीएमसी के भविष्य की दिशा तय करने वाला चुनाव माना जा रहा है। यदि भाजपा यहां जीत दर्ज करती है, तो विधानसभा में उसकी सीटों की संख्या बढ़कर 208 तक पहुंच सकती है, जो राज्य की राजनीति में एक नए शक्ति संतुलन का संकेत होगा।