24 घंटे में शुभेंदु सरकार का बड़ा एक्शन, मदरसों में वंदे मातरम् जरूरी, सरकारी कर्मचारियों के लिए भी तगड़ा फरमान

KNEWS DESK- पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने सत्ता संभालते ही कई बड़े फैसले लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सरकार ने पिछले 24 घंटों के भीतर दो ऐसे आदेश जारी किए हैं, जिन पर पूरे राज्य में चर्चा हो रही है। एक तरफ मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य किया गया है, तो दूसरी ओर सरकारी कर्मचारियों के मीडिया में बयान देने और लेख लिखने पर सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं। विपक्ष इन फैसलों को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रहा है, जबकि सरकार इन्हें अनुशासन और राष्ट्रहित से जुड़ा कदम बता रही है।

राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब पश्चिम बंगाल के सभी सरकारी सहायता प्राप्त और गैर-सरकारी मदरसों में प्रार्थना के समय ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग ने साफ कहा है कि इस आदेश का पालन सभी संस्थानों को करना होगा। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य छात्रों में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना है। हालांकि इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। कुछ संगठनों ने इसे धार्मिक संस्थानों पर सांस्कृतिक दबाव बताया है, जबकि समर्थकों का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ देशभक्ति का प्रतीक है और इसमें किसी तरह का विवाद नहीं होना चाहिए।

इसी के साथ राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए भी नया आचार नियम लागू किया है। नए आदेश के मुताबिक कोई भी सरकारी कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति मीडिया को इंटरव्यू नहीं दे सकेगा और न ही अखबारों या अन्य मंचों पर सरकार की नीतियों पर टिप्पणी कर सकेगा। इतना ही नहीं, सरकारी नीतियों की आलोचना करने वाले लेख या सार्वजनिक बयान देने पर भी रोक लगा दी गई है। इस आदेश के दायरे में शिक्षक, कॉलेज कर्मचारी और अन्य सरकारी विभागों के अधिकारी भी शामिल हैं।

सरकार का तर्क है कि यह कदम प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने और गोपनीय सूचनाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है। लेकिन विपक्षी दलों और कर्मचारी संगठनों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसकी तुलना आपातकाल के दौर से करते हुए कहा कि इससे कर्मचारियों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सत्ता में आते ही कई अन्य बड़े फैसले भी लिए हैं। राज्य में अधिकारियों के तबादले, कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश और पूर्व सरकार के कार्यकाल में हुए कथित घोटालों की जांच तेज कर दी गई है। सरकार ने ‘अन्नपूर्णा योजना’ को भी मंजूरी दे दी है, जिसके तहत राज्य की महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह योजना 1 जून से लागू होगी।

इसके अलावा ओबीसी आरक्षण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए सरकार ने आरक्षण प्रतिशत को 17 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया है। अब केवल 66 जातियां और समुदाय ही ओबीसी आरक्षण के दायरे में रहेंगे। इस फैसले को लेकर भी राजनीतिक विवाद गहरा गया है और कई संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर भी सरकार ने अहम कदम उठाया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ के नाम से जाना जाता है, में 120 एकड़ जमीन केंद्र सरकार को सौंप दी है। यह इलाका उत्तर-पूर्व भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला रणनीतिक कॉरिडोर माना जाता है। सरकार का कहना है कि इस फैसले से सीमा सुरक्षा, बाड़बंदी और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

राज्य में लगातार लिए जा रहे इन फैसलों से साफ है कि नई सरकार अपने एजेंडे को तेजी से लागू करने में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में इन निर्णयों का राजनीतिक और सामाजिक असर कितना गहरा होगा, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।

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