डिजिटल डेस्क- पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव परिणामों ने राज्य की सियासी तस्वीर को पूरी तरह पलट कर रख दिया है। भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक और प्रचंड जीत के बाद जहां भगवा खेमे के कार्यकर्ताओं में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है, वहीं तृणमूल कांग्रेस के अभेद्य किले ढहते नजर आ रहे हैं। इस महाजीत ने न केवल टीएमसी के मंसूबों पर पानी फेर दिया है, बल्कि विपक्षी दलों के बीच सालों से चले आ रहे वर्चस्व के संघर्ष को भी नई दिशा दे दी है।
करीमपुर में कांग्रेस का एक्शन: वर्षों बाद ‘आजाद’ हुआ दफ्तर
राज्य में सत्ता परिवर्तन की आहट के साथ ही नादिया जिले के करीमपुर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सोशल मीडिया पर सनसनी मचा दी है। वायरल हो रहे एक वीडियो में देखा जा सकता है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपने उस पार्टी दफ्तर पर फिर से अधिकार जमा लिया है, जिस पर टीएमसी ने कथित तौर पर सालों से जबरदस्ती और गैर-कानूनी तरीके से कब्जा कर रखा था। जैसे ही राज्य के चुनावी रुझानों में टीएमसी की करारी हार और भाजपा की बढ़त साफ हुई, कांग्रेस कार्यकर्ता सक्रिय हो गए और अपने दफ्तर को टीएमसी के कब्जे से मुक्त करा लिया। सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होते ही लोगों ने टीएमसी पर तंज कसना शुरू कर दिया। एक यूजर ने लिखा, “सत्ता जाते ही हनक भी चली गई,” वहीं एक अन्य ने चुटकी लेते हुए पूछा कि “क्या कांग्रेस इस ‘आजादी’ के लिए भाजपा की जीत का शुक्रिया अदा करेगी?”
राहुल गांधी का टीएमसी के प्रति ‘नरम’ रुख और भाजपा पर हमला
एक ओर जहां जमीन पर कांग्रेस कार्यकर्ता टीएमसी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का रुख कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। टीएमसी की इस ऐतिहासिक हार पर राहुल गांधी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। राहुल ने भाजपा की जीत को ‘जनादेश की चोरी’ करार देते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र को खत्म करने के मिशन का एक हिस्सा बताया। राहुल गांधी ने अपनी ही पार्टी के उन कार्यकर्ताओं और नेताओं को नसीहत दी जो टीएमसी की हार पर जश्न मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में जो लोग टीएमसी की हार पर खुश हो रहे हैं, उन्हें यह समझने की जरूरत है कि यह किसी एक पार्टी की जीत या हार नहीं है। असम और बंगाल के जनादेश की चोरी लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है। हमें छोटी-मोटी पॉलिटिक्स को एक तरफ रखना चाहिए।
सोशल मीडिया पर छिड़ी ‘पुरानी यादों’ की बहस
राहुल गांधी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनके पुराने बयानों को लेकर बहस छिड़ गई है। यूजर्स ने राहुल गांधी के उस बयान को याद दिलाया जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर ममता बनर्जी ने बंगाल को पोलराइज (ध्रुवीकरण) नहीं किया होता और एक साफ-सुथरी सरकार चलाई होती, तो भाजपा के लिए राज्य में रास्ता कभी नहीं खुलता। बंगाल के इन नतीजों ने विपक्षी गठबंधन की अंदरूनी कलह को भी सतह पर ला दिया है। एक तरफ भाजपा की जीत ने टीएमसी के ‘अजेय’ होने के भ्रम को तोड़ दिया है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच विरोधाभास ने गठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा की यह प्रचंड जीत बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है, जहां अब टीएमसी का वर्चस्व इतिहास बनता दिख रहा है।