Knews Desk- आजकल सोशल मीडिया, ईमेल और मैसेजिंग ऐप के जरिए कई तरह के ऑफर और वेबसाइट लिंक लोगों तक पहुंचते हैं। कई बार किसी महंगे प्रोडक्ट पर भारी छूट देखकर लोग बिना जांच किए पेमेंट कर देते हैं। इसी जल्दबाजी का फायदा साइबर ठग उठाते हैं। वे असली कंपनियों के नाम और लोगो का इस्तेमाल करके नकली वेबसाइट बनाते हैं, ताकि लोग उन पर भरोसा कर अपनी संवेदनशील जानकारी साझा कर दें।
फर्जी वेबसाइट की पहचान करने के लिए सबसे पहले उसके URL यानी वेब एड्रेस को ध्यान से जांचें। ठग कई बार असली कंपनी के नाम की स्पेलिंग में मामूली बदलाव करके या उसमें अतिरिक्त शब्द जोड़कर नकली लिंक तैयार करते हैं। इसलिए किसी मैसेज या सोशल मीडिया पोस्ट में मिले लिंक पर तुरंत क्लिक करने से बचें। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट का पता खुद टाइप करना या उसके सत्यापित अकाउंट से मिले लिंक का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है।वेबसाइट के डिजाइन और भाषा पर भी ध्यान देना चाहिए। अगर उसमें वर्तनी की गलतियां, अजीब भाषा, धुंधली तस्वीरें या डिजाइन से जुड़ी गड़बड़ियां नजर आती हैं, तो सतर्क हो जाएं। हालांकि, अच्छी डिजाइन वाली वेबसाइट भी नकली हो सकती है। इसलिए केवल उसके दिखने के तरीके के आधार पर भरोसा करना सही नहीं है। वेबसाइट पर कंपनी का पता, कस्टमर केयर नंबर और संपर्क से जुड़ी जानकारी भी जांचें।
ऑनलाइन खरीदारी करते समय जरूरत से ज्यादा सस्ते ऑफर देखकर तुरंत पेमेंट न करें। अगर किसी महंगे स्मार्टफोन या अन्य प्रोडक्ट की कीमत सामान्य से बहुत कम दिखाई दे रही है, तो पहले आधिकारिक वेबसाइट पर कीमत की तुलना करें। ‘अभी खरीदें’ या ‘ऑफर कुछ ही मिनटों में खत्म’ जैसे संदेशों के दबाव में आकर फैसला लेने से बचें। फर्जी वेबसाइट अक्सर जल्दबाजी पैदा करके लोगों को भुगतान करने के लिए प्रेरित करती हैं।नया ऐप डाउनलोड करने से पहले उसके डेवलपर का नाम, यूजर रिव्यू, डाउनलोड की संख्या और उपलब्धता की जानकारी जांचें। केवल अच्छी रेटिंग देखकर ऐप को सुरक्षित न मानें, क्योंकि कुछ रिव्यू नकली भी हो सकते हैं। ऐप इंस्टॉल करते समय यह भी देखें कि वह फोन में किन चीजों की परमिशन मांग रहा है। उदाहरण के लिए, किसी सामान्य शॉपिंग ऐप को कॉन्टैक्ट्स या कॉल लॉग का एक्सेस चाहिए, तो इसकी जरूरत पर सवाल करना उचित है।
Android फोन इस्तेमाल करने वाले लोगों को Google Play Protect चालू रखना चाहिए। यह संभावित रूप से नुकसान पहुंचाने वाले ऐप्स की जांच करने और उनके बारे में चेतावनी देने में मदद करता है। ऐप डाउनलोड करने के लिए आधिकारिक ऐप स्टोर का इस्तेमाल करें और अनजान वेबसाइट से APK फाइल इंस्टॉल करने से बचें।किसी भी वेबसाइट पर बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड या OTP साझा करने से पहले उसकी विश्वसनीयता सुनिश्चित करें। अगर कोई लिंक संदिग्ध लगे, तो उसे खोलने से बचें। ऑनलाइन ठगी का संदेह होने पर तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें और भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन या आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल का इस्तेमाल करें। थोड़ी-सी सावधानी आपकी निजी जानकारी और मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है।