Knews Desk- कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पुरुष जेवलिन थ्रो फाइनल में श्रीलंका के युवा एथलीट रुमेश पथिरागे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। 23 वर्षीय पथिरागे ने 89.75 मीटर का थ्रो करते हुए भारत के स्टार जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा को पीछे छोड़ दिया। खास बात यह है कि जेवलिन में पहचान बनाने से पहले पथिरागे क्रिकेट के मैदान पर तेज गेंदबाज के रूप में अपना दम दिखा चुके हैं।
शुक्रवार, 31 जुलाई को खेले गए पुरुष जेवलिन थ्रो फाइनल में रुमेश पथिरागे ने 89.75 मीटर दूर भाला फेंककर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। इस प्रदर्शन के साथ वह 2006 के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले श्रीलंका के पहले खिलाड़ी भी बन गए।
फाइनल में भारत के नीरज चोपड़ा को गोल्ड मेडल का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। हालांकि, पथिरागे के दमदार थ्रो ने मुकाबले का रुख बदल दिया। नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर मेडल हासिल किया, जबकि भारत के यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर के प्रदर्शन के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता।
क्रिकेटर से कैसे बने जेवलिन थ्रोअर?
रुमेश पथिरागे का खेल सफर बेहद दिलचस्प रहा है। जेवलिन को अपना करियर बनाने से पहले वह क्रिकेट खेलते थे और मीडियम पेस गेंदबाजी करते थे। क्रिकेट के दिनों में उनकी गेंदों की रफ्तार करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे रहती थी।
अंडर-18 स्तर पर पथिरागे ने करीब 134 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी गेंदबाजी की थी। उस समय उनकी गिनती श्रीलंका के उभरते तेज गेंदबाजों में होती थी।
ईशान मलिंगा को देते थे टक्कर
पथिरागे की गेंदबाजी की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंडर-18 कैटेगरी में वह ईशान मलिंगा के बाद दूसरे सबसे तेज गेंदबाज बताए जाते थे। ईशान मलिंगा बाद में श्रीलंका की क्रिकेट टीम और सनराइजर्स हैदराबाद का हिस्सा बने।
हालांकि, पथिरागे की किस्मत उन्हें क्रिकेट के बजाय एथलेटिक्स की ओर ले गई। उन्होंने क्रिकेट छोड़कर जेवलिन थ्रो पर पूरा ध्यान देना शुरू किया और धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।
पथिरागे के जेवलिन करियर में उनके कोच टोनी प्रसन्ना की अहम भूमिका रही है। पथिरागे के मुताबिक, टोनी ने ही उन्हें जेवलिन से परिचित कराया और खेल की बुनियादी तकनीकों पर काम करने के लिए प्रेरित किया।
पथिरागे अपने कोच को सिर्फ खेल का प्रशिक्षक नहीं, बल्कि जिंदगी में मार्गदर्शन देने वाला व्यक्ति भी मानते हैं। लगातार मेहनत और तकनीक में सुधार का नतीजा अब कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड मेडल के रूप में सामने आया है।
अब ओलंपिक गोल्ड पर नजर
कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन के बाद रुमेश पथिरागे की नजर अब और बड़े लक्ष्य पर है। उनका सपना ओलंपिक में श्रीलंका के लिए जेवलिन थ्रो में गोल्ड मेडल जीतना है। कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज चोपड़ा जैसे दिग्गज खिलाड़ी को पछाड़ने के बाद पथिरागे ने अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स में अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर दी है।
गोल्ड: रुमेश पथिरागे (श्रीलंका) – 89.75 मीटर
सिल्वर: नीरज चोपड़ा (भारत) – 85.83 मीटर
ब्रॉन्ज: यशवीर सिंह (भारत) – 85.41 मीटर