Knews Desk– भारतीय टेनिस के लिए विंबलडन 2026 से एक बड़ी खुशखबरी आई है। पुणे के 18 वर्षीय युवा खिलाड़ी अर्णव पापरकर ने विंबलडन जूनियर बॉयज सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाकर इतिहास रच दिया है। वह पिछले 36 वर्षों में इस मुकाम तक पहुंचने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले भारतीय टेनिस के दिग्गज लिएंडर पेस ने 1990 में विंबलडन जूनियर के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी। अर्णव की इस उपलब्धि ने भारतीय टेनिस प्रशंसकों को नई उम्मीद दी है और उन्हें देश के उभरते सितारों में शामिल कर दिया है।

अर्णव पापरकर का प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में शानदार रहा है। सबसे खास बात यह है कि उन्होंने अब तक एक भी सेट नहीं गंवाया है। प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उन्होंने जापान के रियो तबाता को महज 52 मिनट में 6-2, 6-1 से हराकर अंतिम-8 में अपनी जगह पक्की की। इस मैच में उनकी दमदार सर्विस, बेहतरीन रिटर्न और आक्रामक खेल देखने को मिला। उन्होंने शुरुआत से ही मुकाबले पर नियंत्रण बनाए रखा और अपने प्रतिद्वंद्वी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया।इससे पहले दूसरे दौर में अर्णव ने टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए जूनियर विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर काबिज अमेरिका के कीटन हैंस को सीधे सेटों में 6-2, 6-3 से हराया था। कीटन हैंस ऑस्ट्रेलियन ओपन जूनियर के फाइनलिस्ट भी रह चुके हैं, इसलिए इस जीत को अर्णव के करियर की सबसे बड़ी सफलताओं में गिना जा रहा है। इस जीत ने यह साबित कर दिया कि भारतीय खिलाड़ी बड़े मंच पर दुनिया के शीर्ष जूनियर खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं।
अब क्वार्टर फाइनल में अर्णव का सामना अमेरिका के जॉर्डन ली से होगा। यह मुकाबला काफी रोमांचक माना जा रहा है क्योंकि दोनों खिलाड़ी शानदार फॉर्म में हैं। यदि अर्णव इस मुकाबले में जीत दर्ज करते हैं तो वह विंबलडन जूनियर के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों में अपना नाम दर्ज करा लेंगे। भारतीय टेनिस प्रेमियों को उनसे काफी उम्मीदें हैं और सभी की निगाहें अब उनके अगले मैच पर टिकी हैं।करीब 6 फीट 1 इंच लंबे अर्णव पापरकर अपनी तेज और सटीक सर्विस के लिए जाने जाते हैं। वह अक्सर ‘ऐस’ लगाकर सीधे अंक हासिल करते हैं, जो उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। इसके अलावा उनकी फिटनेस, तेज फुटवर्क और आक्रामक खेलने की शैली भी उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाती है। अर्णव ने सिर्फ छह साल की उम्र में टेनिस खेलना शुरू किया था और लगातार मेहनत के दम पर आज वह अंतरराष्ट्रीय जूनियर सर्किट में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। कुछ ही सप्ताह पहले उन्होंने फ्रेंच ओपन जूनियर में तीसरे दौर तक का सफर तय किया था, जबकि अब विंबलडन में उससे भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है।
अर्णव पापरकर की यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि भारतीय टेनिस के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। पिछले कई वर्षों से भारत को पुरुष सिंगल्स टेनिस में किसी बड़ी उपलब्धि का इंतजार था। ऐसे में अर्णव का यह प्रदर्शन आने वाले समय में देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा। अगर वह इसी तरह अपना शानदार खेल जारी रखते हैं, तो भविष्य में सीनियर स्तर पर भी भारत को उनसे बड़ी सफलताओं की उम्मीद की जा सकती है।