Knews Desk- भारत की न्याय व्यवस्था और संसदीय इतिहास में अशोक कुमार सेन का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। वे स्वतंत्र भारत के सबसे लंबे समय तक कानून मंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल रहे। जवाहरलाल नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक कई सरकारों में उन्होंने कानून मंत्री की जिम्मेदारी निभाई। पांच बार सांसद रहे AK Sen की कानूनी विशेषज्ञता और सार्वजनिक जीवन में योगदान को याद करते हुए हाल ही में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने उन्हें विशेष श्रद्धांजलि दी।
SCBA ने दिवंगत वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार सेन की स्मृति में एक विशेष व्याख्यान और चित्र अनावरण समारोह आयोजित किया। इस कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने उनकी तस्वीर का अनावरण किया। यह आयोजन भारतीय न्याय व्यवस्था और विधि जगत में उनके योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से किया गया। AK Sen लंबे समय तक सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे थे।
अशोक कुमार सेन का जन्म 10 अक्टूबर 1913 को वर्तमान बांग्लादेश के फरीदपुर जिले में हुआ था। उनके पिता जिला मजिस्ट्रेट थे। शुरुआती शिक्षा ओडिशा के संबलपुर हाई स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) और ग्रेज़ इन (Gray’s Inn) से कानून की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 1943 में उन्होंने अंजना दास से विवाह किया। उनके छोटे भाई सुकुमार सेन स्वतंत्र भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त बने थे।

विदेश से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिटी कॉलेज, कोलकाता में कानून पढ़ाना शुरू किया और बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट में वकालत करने लगे। कम समय में ही वे अपनी मजबूत कानूनी दलीलों के कारण चर्चित वकीलों में शामिल हो गए। उन्होंने वाणिज्यिक कानून पर पुस्तक लिखी और Calcutta Law Journal के संपादक भी रहे। करीब एक दशक तक वे सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे।
उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर तत्कालीन पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र रॉय ने उनकी सिफारिश प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से की। नेहरू के आग्रह पर उन्होंने 1957 में उत्तर-पश्चिम कोलकाता लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और कम्युनिस्टों के मजबूत गढ़ में बड़ी जीत दर्ज की। वे 1957 से 1977 तक लगातार सांसद रहे और 1980 में फिर लोकसभा पहुंचे। अपने राजनीतिक जीवन में वे कुल पांच बार सांसद चुने गए।
1957 में पहली बार उन्हें नेहरू सरकार में कानून मंत्री बनाया गया। इसके बाद उन्होंने संचार, इस्पात और खान मंत्रालय जैसे अहम विभागों की भी जिम्मेदारी संभाली। हालांकि उनकी सबसे बड़ी पहचान कानून मंत्री के रूप में ही रही। नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के दौर में उन्होंने कानून मंत्रालय का नेतृत्व किया और स्वतंत्र भारत के सबसे लंबे समय तक कानून मंत्री रहने वालों में अपना नाम दर्ज कराया।
AK Sen ने संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। बाद में वे राज्यसभा सदस्य भी बने और 1996 तक संसद से जुड़े रहे। दुर्लभ कानूनी पुस्तकों का उनका निजी संग्रह भी काफी प्रसिद्ध था। सितंबर 1996 में उनका निधन हो गया। भारतीय न्यायपालिका, वकालत और संसदीय लोकतंत्र में उनके योगदान को आज भी सम्मानपूर्वक याद किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट में आयोजित हालिया श्रद्धांजलि समारोह इसी विरासत का प्रतीक माना जा रहा है।