Sawan 4th Somwar 2026: सावन के आखिरी सोमवार पर बनेंगे 5 शुभ संयोग, जानें पूजा का सही मुहूर्त

KNEWS DESK- सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है. इस दौरान शिव भक्त सोमवार के दिन व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक कर महादेव की पूजा करते हैं. साल 2026 में सावन का चौथा और आखिरी सोमवार 24 अगस्त को पड़ रहा है. इस दिन कई शुभ योग और धार्मिक संयोग बन रहे हैं, जिसके चलते इस सोमवार का महत्व और बढ़ गया है.

मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है. आइए जानते हैं 24 अगस्त को कौन-कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं और इस दिन जलाभिषेक का सही समय क्या रहेगा.

24 अगस्त को सावन का आखिरी सोमवार

सावन 2026 का चौथा सोमवार 24 अगस्त को है. इस दिन एक खास संयोग यह भी है कि सावन पुत्रदा एकादशी के व्रत का पारण किया जाएगा. ऐसे में भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना का अवसर एक ही दिन मिल रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन सोमवार के दिन भगवान शिव का पूजन, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक विशेष फलदायी माना जाता है. इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर भक्त महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं.

आखिरी सोमवार पर बनेंगे 5 शुभ संयोग

पुत्रदा एकादशी पारण का संयोग

24 अगस्त को सावन पुत्रदा एकादशी के व्रत का पारण किया जाएगा. इस वजह से इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा का विशेष धार्मिक संयोग बन रहा है. भक्त सुबह भगवान विष्णु की पूजा और एकादशी पारण के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकते हैं.

प्रीति योग

सावन के आखिरी सोमवार की शुरुआत प्रीति योग से होगी. यह योग सुबह 7:04 बजे तक रहने की जानकारी है. ज्योतिषीय मान्यताओं में प्रीति योग को शुभ और सकारात्मक माना जाता है. इस दौरान पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्य करना फलदायी माना जाता है.

आयुष्मान योग

प्रीति योग समाप्त होने के बाद सुबह 7:04 बजे से आयुष्मान योग शुरू होगा, जो पूरे दिन रहने वाला है. ज्योतिष में आयुष्मान योग को स्वास्थ्य, दीर्घायु और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है. इस दौरान भगवान शिव की आराधना करना शुभ माना जाता है.

कैलाश पर शिववास

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव का वास कैलाश पर्वत पर माना जा रहा है. मान्यता है कि शिववास कैलाश पर होने के दौरान रुद्राभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और घर में सुख-शांति का वातावरण बना रहता है.

हंसराज योग

24 अगस्त को हंसराज योग का भी संयोग बताया जा रहा है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार गुरु कर्क राशि में उच्च स्थिति में रहेंगे, जबकि चंद्रमा धनु और सूर्य सिंह राशि में रहेंगे. हंसराज योग को शुभ और उन्नति प्रदान करने वाला माना जाता है.

सावन के आखिरी सोमवार जलाभिषेक का शुभ समय

भगवान शिव का जलाभिषेक सावन सोमवार को किसी भी समय श्रद्धा के साथ किया जा सकता है. हालांकि, इस दिन कुछ विशेष शुभ मुहूर्त भी बताए गए हैं, जिनमें पूजा और अभिषेक करना शुभ माना जाता है.

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:27 बजे से 5:11 बजे तक
  • अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 5:55 बजे से 7:32 बजे तक
  • शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह 9:09 बजे से 10:46 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक
  • प्रदोष काल: शाम 6:55 बजे से 7:15 बजे तक

शिव भक्त अपनी सुविधा के अनुसार इन मुहूर्तों में जलाभिषेक या रुद्राभिषेक कर सकते हैं. हालांकि, भगवान शिव की पूजा के लिए किसी विशेष समय का इंतजार करना जरूरी नहीं माना जाता. श्रद्धा से दिन में कभी भी शिवलिंग पर जल अर्पित किया जा सकता है.

कैसे करें भगवान शिव का जलाभिषेक?

सावन के आखिरी सोमवार पर सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें. इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें. एक साफ पात्र में जल लेकर उसमें थोड़ा गंगाजल मिलाएं और शिवलिंग पर अर्पित करें. इसके बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक किया जा सकता है. अंत में साफ जल चढ़ाकर शिवलिंग पर बेलपत्र, फूल और चंदन अर्पित करें. पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और भगवान शिव की आरती करें.

आखिरी सोमवार पर शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं?

सावन के अंतिम सोमवार को भगवान शिव को गंगाजल, पंचामृत, बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और चंदन अर्पित करने की मान्यता है. इसके अलावा श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार शहद, गन्ने का रस और नारियल का जल भी अर्पित कर सकते हैं. धार्मिक मान्यताओं में अलग-अलग चीजों को अलग-अलग मनोकामनाओं से जोड़ा गया है. हालांकि, भगवान शिव की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा और भक्ति को माना जाता है.

कर सकते हैं सावन सोमवार व्रत का उद्यापन

जो भक्त पूरे सावन सोमवार का व्रत रखते हैं, वे आखिरी सोमवार के दिन व्रत का उद्यापन भी कर सकते हैं. उद्यापन में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा, हवन और जरूरतमंदों को भोजन या दान देने की परंपरा है.

इस तरह 24 अगस्त 2026 का सावन का आखिरी सोमवार शिव भक्तों के लिए पूजा, जलाभिषेक और धार्मिक साधना के लिहाज से विशेष माना जा रहा है. पांच शुभ संयोगों के चलते इस दिन भगवान शिव की आराधना का महत्व और बढ़ जाता है.

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