पंचक के साए में गणपति बप्पा की विदाई, जानें इस दौरान क्या करें और क्या नहीं?

KNEWS DESK- गणेश उत्सव के समापन और पितृ पक्ष की शुरुआत के बीच इस बार पंचक का संयोग बन रहा है। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा का विसर्जन होगा, जबकि 26 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो जाएगा। ऐसे में गणेश भक्त पंचक के दौरान ही बप्पा को विदाई देंगे। जानिए सितंबर में पंचक का समय और इस दौरान किन कार्यों से बचना चाहिए।

हिंदू धर्म और ज्योतिष में पंचक को पांच दिनों की ऐसी अवधि माना जाता है, जिसमें कुछ विशेष कार्यों को करने की मनाही होती है। हर 27 दिन में जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से गुजरता है, तब पंचक की अवधि बनती है।

सितंबर 2026 में पंचक 23 सितंबर, बुधवार की रात 09:57 बजे से शुरू हो रहे हैं। इस दौरान 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी का पर्व होगा और इसी दिन गणेश विसर्जन किया जाएगा। इसके बाद 26 सितंबर से पितृ पक्ष की शुरुआत होगी। द्रिक पंचांग के अनुसार, चंद्रमा 23 सितंबर की रात 09:56 बजे से 26 सितंबर की सुबह 05:32 बजे तक कुंभ राशि में रहेगा। इसके बाद चंद्रमा मीन राशि में प्रवेश करेगा और 28 सितंबर की सुबह 10:15 बजे तक इसी राशि में रहेगा।

इन पांच दिनों के दौरान तीन महत्वपूर्ण अवसर भी पड़ रहे हैं। 24 सितंबर को गुरु प्रदोष व्रत रखा जाएगा। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाएगी। वहीं 26 सितंबर से पितृ पक्ष का शुभारंभ होगा।

पंचक के दौरान गणेश विसर्जन को लेकर भक्तों के मन में अक्सर सवाल रहता है कि क्या इस अवधि में बप्पा को विदाई दी जा सकती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक में गणेश विसर्जन करने में कोई बाधा नहीं है। पंचक के दौरान पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकते हैं। गणपति बप्पा को विघ्नहर्ता माना जाता है, इसलिए भक्त पंचक के दौरान भी श्रद्धा और भक्ति के साथ उनका विसर्जन कर सकते हैं।

इसी तरह 26 सितंबर से शुरू होने वाले पितृ पक्ष में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म भी किए जा सकते हैं। पंचक के कारण इन धार्मिक कार्यों में बाधा नहीं मानी जाती है। हालांकि पंचक के दौरान कुछ सामान्य कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। इस अवधि में लकड़ी या लकड़ी से बनी वस्तुएं खरीदने से बचना चाहिए। इसके अलावा बिस्तर या पलंग खरीदने की भी मनाही मानी जाती है।

पंचक के दौरान नए घर का निर्माण शुरू करने, घर पर छत डलवाने या पहली चौखट लगाने जैसे कार्य भी नहीं करने चाहिए। इसके अलावा दक्षिण दिशा की यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। सितंबर में शुरू होने वाले ये पंचक बुधवार से लग रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार से शुरू होने वाले पंचक को शुक्रवार से लगने वाले चोर पंचक, शनिवार से लगने वाले मृत्यु पंचक और मंगलवार से लगने वाले अग्नि पंचक की तरह बेहद अशुभ नहीं माना जाता है। ऐसे में गणेश विसर्जन और पितृ पक्ष से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा के साथ किए जा सकते हैं।

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