धनतेरस पर पूजा-पाठ के साथ मंत्र जाप का भी विशेष महत्व माना जाता है। इस बार शुक्रवार को धनतेरस पड़ने से इसे माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए खास अवसर माना जा रहा है। शाम की पूजा के दौरान लक्ष्मी, कुबेर और भगवान धन्वंतरि के इन मंत्रों का जाप करने से सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की जाती है।
KNEWS DESK- आज 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को देशभर में धनतेरस का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में धनतेरस को सुख, समृद्धि, आरोग्य और धन से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। मान्यता के अनुसार धनतेरस पर सोना, चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर यमराज के निमित्त दीपदान करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यम दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इसके अलावा पूजा के दौरान देवी-देवताओं के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है।
इस बार क्यों खास है धनतेरस?
इस साल धनतेरस शुक्रवार के दिन पड़ रही है। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। ऐसे में धनतेरस और शुक्रवार का यह संयोग मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस शुभ अवसर पर शाम के समय माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि के मंत्रों का जाप करना चाहिए। माना जाता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ मंत्र जाप करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और धन-धान्य, सुख-समृद्धि तथा अच्छे स्वास्थ्य की कामना पूरी होती है।
धनतेरस पर मंत्र जाप क्यों किया जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंत्र जाप से मन को एकाग्र करने और पूजा में ध्यान लगाने में सहायता मिलती है। धनतेरस पर माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप धन और वैभव की कामना के लिए किया जाता है। भगवान कुबेर के मंत्र आर्थिक स्थिरता और धन-धान्य की वृद्धि से जुड़े माने जाते हैं। वहीं भगवान धन्वंतरि के मंत्र अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना के लिए जाप किए जाते हैं। मान्यता है कि धनतेरस की पूजा के दौरान इन मंत्रों का 108 बार जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है।
भगवान धन्वंतरि के मंत्र
भगवान धन्वंतरि को आरोग्य का देवता माना जाता है। धनतेरस पर उनके मंत्रों का जाप अच्छे स्वास्थ्य और आयु की कामना के लिए किया जाता है।
- ॐ धन्वंतरये नमः
- ॐ नमो भगवते धन्वन्तरये अमृतकलश हस्ताय सर्वमय विनाशाय त्रैलोक्य नाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः
माता लक्ष्मी के मंत्र
माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है। धनतेरस की पूजा में उनके मंत्रों का जाप विशेष रूप से किया जाता है।
- ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
- ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः
- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
भगवान कुबेर के मंत्र
भगवान कुबेर को धन के देवता के रूप में पूजा जाता है। धनतेरस पर कुबेर मंत्रों का जाप आर्थिक स्थिरता और धन-धान्य की वृद्धि की कामना के लिए किया जाता है।
- ॐ श्री कुबेराय नमः
- ॐ वैश्रवणाय स्वाहा
- ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
यम दीपदान का मंत्र
धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार इससे अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति की कामना की जाती है। दीपदान करते समय इस मंत्र का जाप किया जा सकता है।
- मृत्युनाऽ पाशहस्तेन कालेन भार्या सह। त्रयोदशीं दीपदानात् सूर्यजः प्रियतामिति॥
कैसे करें मंत्र जाप?
धनतेरस की शाम पूजा स्थल की साफ-सफाई करने के बाद माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की विधिवत पूजा करें। दीपक जलाकर देवी-देवताओं का ध्यान करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्रों का जाप करें। मंत्रों का जाप शांत मन से करना चाहिए। मान्यता के अनुसार प्रत्येक मंत्र का 108 बार जाप विशेष फलदायी माना जाता है।
पूजा के बाद घर के मुख्य द्वार पर यमराज के निमित्त दीपक जलाएं और यम दीपदान का मंत्र पढ़ें। धार्मिक मान्यता के अनुसार धनतेरस पर पूजा, मंत्र जाप और दीपदान करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और आरोग्य की कृपा बनी रहती है।