KNEWS DESK- सावन माह में पड़ने वाला सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन प्रदोष काल में महादेव की पूजा करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मिलने की धार्मिक मान्यता है।
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। जिस दिन यह व्रत पड़ता है, उसी वार के नाम से इसे जाना जाता है। सोमवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत सोम प्रदोष कहलाता है, जो भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए बेहद फलदायी माना जाता है।
सावन का महीना वैसे भी भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। ऐसे में सावन में आने वाला सोम प्रदोष व्रत भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। साल 2026 में सावन माह की शुरुआत 30 जुलाई से होगी और इसका समापन 28 अगस्त को होगा। सावन माह में 10 अगस्त, सोमवार के दिन सोम प्रदोष व्रत का शुभ संयोग बन रहा है।
सावन सोम प्रदोष व्रत 2026 की तिथि
पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 अगस्त 2026, सोमवार सुबह 8 बजे से शुरू होगी। वहीं, इसका समापन 11 अगस्त 2026, मंगलवार सुबह 4 बजकर 54 मिनट पर होगा। प्रदोष काल को ध्यान में रखते हुए सोम प्रदोष व्रत 10 अगस्त को ही रखा जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त
सावन सोम प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में करना विशेष शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार, 10 अगस्त को प्रदोष काल शाम 7 बजकर 05 मिनट से शुरू होकर रात 9 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इस दौरान शिव भक्तों को पूजा-अर्चना के लिए करीब 2 घंटे 9 मिनट का शुभ समय मिलेगा।
सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि
सोम प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करें। शाम के समय प्रदोष काल में विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करें।
पूजा के दौरान शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, चंदन और फूल अर्पित करें। शिव मंत्रों का जाप करते हुए प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें। पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती कर प्रसाद वितरित करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोम प्रदोष व्रत रखने और पूरी श्रद्धा से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और महादेव की कृपा बनी रहती है। सावन के इस विशेष अवसर पर शिव आराधना करने से भक्तों को शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है।